कानपुर सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी लिमिटेड जनवरी के अंत तक 100 इलेक्ट्रिक बसों को चलाने लगेगा। ग्रामीण इलाकों को भी ई बसों से जोड़ने की तैयारी है। 100में से 40 बसों को ग्रामीण इलाकों से शहर मुख्यालय से जोड़ने की कवायद है।
दिसंबर के अंत तक जो 60 बसों को चलना है, वह शहरी इलाकों में ही चलेंगी। 11 दिसंबर से 20 ई बसों से उद्घाटन हुआ था। 20 दिसंबर से 20 और ई बसें चलने लगेंगी। दिसंबर के अंत तक कुल 60 बसों का संचालन होगा। 40 ई-बसें नए साल में शहर आ जाएंगी।
इन सभी बसों को ग्रामीण इलाकों से जोड़ते हुए चलाया जाएगा। बिल्हौर से आईआईटी, बिल्हौर से बड़ा चौराहा, माती से नौबस्ता, मंधना से रामादेवी वाया मालरोड रूट पर बसों का संचालन कराने की योजना है। जिला प्रशासन की संस्तुति के लिए 30 दिसंबर को इस मसले पर बैठक होनी है।
गुटखा खाकर या लेकर गए तो उतारे जाओगे
इलेक्ट्रिक बस सेवा के क्षेत्रीय प्रबंधक डीबी सिंह के मुताबिक ई-बसों में सफाई का बेहद ध्यान रखा जा रहा है। कोई यात्री गुटखा खाते या किसी की जेब में गुटखा, सिगरेट मिली तो उसे उतार दिया जाएगा। सभी ई-बसों के कंडक्टरों और चेकिंग स्टाफ को हिदायत दी गई है।
चार दिन में पांच गुना बढ़ी ई-बसों की कमाई
11 दिसंबर से शुरू हुईं 20 इलेक्ट्रिक बसों की कमाई धीरे-धीरे बढ़ रही है। पहले दिन 18 हजार रुपये की कमाई हुई थी। चौथे दिन यह 90 हजार रुपये पहुंच गई। अफसरों के मुुताबिक एक लाख प्रतिदिन की आय पहुंचने पर ई-बसों का संचालन फायदे का सौदा साबित होने लगेगा।
प्रदूषण में आएगी गिरावट
ई-बसों के संचालन से प्रदूषण में कमी आने की संभावना है। जिन यात्रियों को ईंधन की महक से उल्टी होती है, उनके लिए भी बसें बेहद प्राकृतिक यात्रा का एहसास करा रही हैं। ऐसे में यात्रियों का इस तरफ रुझान बढ़ रहा है। विज्ञापन समेत अन्य स्रोतों से आमदनी बढ़ाकर राजस्व बढ़ाने पर जोर होगा।