बिरहाना रोड स्थित मेडिकल स्टोर में छापा मारती ड्रग विभाग की टीम
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर में नशीली दवाओं का खेल बिना रोक टोक चल रहा है। बिना डॉक्टर की सलाह या उनके पर्चे के नशीली दवाएं ऐसे बिक रही हैं, जैसे कि परचून की दुकान पर चूरन मिल रहा हो। इसका खुलासा ड्रग विभाग की कार्रवाई में हो रहा है, जब से टीम छापा मार रही है, कोई भी मेडिकल स्टोर संचालक जो नशीली दवाएं बेच रहे थे। उसका लेखा जोखा नहीं दे पाए। ऐसा ही बुधवार को भी हुआ जब ड्रग विभाग की दो टीमों ने शहर में कई जगह छापा मारकर नशीली दवाएं मिलने पर उनकी खरीद बिक्री पर रोक लगा दी।
ड्रग इंस्पेक्टर कानपुर ओमपाल सिंह-रेखा सचान, कानपुर देहात से अजय कुमार संतोषी व कन्नौज से परमेश द्विवेदी, इटावा से नीलेश शर्मा, औरैया से ज्योत्सना आनंद की संयुक्त टीम ने बिरहाना रोड के अग्रवाल ब्रदर्स व शांति इंटरप्राइजेज में छापा मारा और नशीली दवाओं की खरीद बिक्री का ब्योरा न दे पाने पर उनके खरीदने व बिक्री करने दोनों पर रोक लगा दी है।
आर एस हेल्थकेयर ओमपुरवा में जांच करती ड्रग विभाग की टीम
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टीम सबसे पहले अग्रवाल ब्रदर्स के यहां पहुंची, जहां टीम ने जाते ही ट्रॉमाडोल, ओडीन, एल्प्राजोलम व टेपेंटाडोल की खरीद और बिक्री पर रोक लगा दी। ये दवाएं नशे के रूप में भी प्रयोग की जाती हैं। दरअसल ड्रग विभाग ने जुलाई में अग्रवाल ब्रदर्स के यहां छापा मारकर आठ से दस दवाओं के सैंपल लिए थे। उस समय इनके यहां ये सभी दवाएं बिक रही थी, जिसके दो साल का लेखा जोखा टीम ने मांगा और उन्हें समय भी दिया। तीन महीनें से ज्यादा बीत जाने के बावजूद मेडिकल स्टोर के संचालक विनोद अग्रवाल ने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए तो बुधवार को ड्रग इंस्पेक्टर ने उनके यहां इन दवाओं पर रोक लगाई। वहीं दूसरा छापा बिरहाना रोड स्थित शांति इंटरप्राइजेज में मारा गया। यहां से टीम ने दो दवाओं के सैंपल इकट्ठा किए जिसमें एक सिरप और दूसरी टेबलेट का सैंपल टीम ने जांच के लिए इकट्ठा किया। टीम को शिकायत मिली कि यहां कोडीन बेची जा रही थी। इसके बाद ये कार्रवाई की गई।
आर एस हेल्थकेयर ओमपुरवा में जांच करती ड्रग विभाग की टीम
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वहीं दूसरी टीम ने लालबंगला और केशवपुरम में छापा मारकर छह सैंपल इकट्ठा किए और दोनों मेडिकल स्टोरों पर नशीली दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी। लालबंगला ओमपुरवा स्थित आर एस हेल्थ केयर ( अनमोल गुप्ता ) और केशवपुरम स्थित एएस हेल्थ केयर (दिनेश तिवारी) के यहां छापा मारा गया और सिरप व टेबलेट जो खांसी व एंटीबायोटिक के सैंपल इकट्ठा किए। दोनों ही जगहों पर उनके कंप्यूटर में नशीली दवाओं जिसमें फेंसिपिक-टी व फेंसिपिक-टीपी का स्टॉक नजर आया, लेकिन मौके पर ये दवाएं नहीं मिलीं। पूछने पर बताया कि बिक गई हैं। टीम ने पूरे मेडिकल स्टोर के साथ ही जिस भवन में मेडिकल स्टोर संचालित था वहां पर छापा मारा लेकिन स्टॉक कहीं नहीं मिल सका। जबकि कंप्यूटर में दिख रही बाकी दवाओं का स्टॉक टीम को वहां पर मिला। टीम ने दोनों ही जगहों पर नशीली हर तरह की दवाई बेचने खरीदने पर रोक लगा दी है। ड्रग इंस्पेक्टर रेखा सचान ने बताया कि जब तक वे अपने दस्तावेज नहीं सौंपते हैं। उन्हें दवाएं बेचने की अनुमति नहीं मिलेगी। रेखा सचान ने बताया कि विभाग में इन दिनों नकली व नशीली दवाओं की शिकायतें भी आ रही हैं, जिनकी जांच की जा रही है। ये जांचें लखनऊ में मिली नशीली दवाओं के क्रम में की जा रही हैं।