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Kanpur: एक बार में ज्यादा कसरत न करें, पड़ सकता है हार्ट अटैक, आपके लिए जरूरी जानकारी

Sun, 12 Feb 2023 03:02 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

40 साल की उम्र के बाद अगर व्यायाम का शौक हो तो इकट्ठे एक बार में ही व्यायाम न करें। धीरे-धीरे व्यायाम की अवधि बढ़ाएं तो सुरक्षित रहेंगे। अधिक दबाव होने से हार्ट अटैक आ सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock
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विस्तार
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कानपुर में कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के बैनर तले आयोजित कार्डियोकॉन-2023 के पहले दिन विशेषज्ञों ने हृदय के इलाज के विभिन्न पहलुओं पर रोशनी डाली। नाचने-गाने और व्यायाम करते वक्त हार्ट अटैक आने के मसलों को लेकर विशेषज्ञों ने बताया कि 40 साल की उम्र के बाद अगर व्यायाम का शौक हो तो इकट्ठे एक बार में ही व्यायाम न करें। धीरे-धीरे व्यायाम की अवधि बढ़ाएं तो सुरक्षित रहेंगे। अधिक दबाव होने से हार्ट अटैक आ सकता है। इसके साथ ही बच्चों के हृदय के छेद के इलाज के संबंध में बताया गया।

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इस मौके पर अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आर. कृष्ण कुमार ने बताया कि नवजातों के इलाज पर लोग ध्यान नहीं देते। हृदय में छेद के इलाज के लिए अब उपकरण आ गए हैं। इससे बच्चों की मृत्यु दर कम हुई है। डॉ. कुमार के मॉडल को सरकार राष्ट्रीय बाल सुरक्षा योजना में भी शामिल कर रही है।

दो दिवसीय कार्डियोकॉन-2023 का आयोजन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में किया गया है। कार्डियोकॉन में वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपीएस भारद्वाज को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। साथ ही डीएम, एसीएच कोर्स के मेधावी डॉक्टर छात्रों को भी सम्मानित किया गया। इस मौके  पर हृदय रोग और उनके उपचार में डॉक्टर की भूमिका विषय पर एसजीपीजीआई लखनऊ के डॉ. सत्येंद्र तिवारी ने डॉ. एससी जैन व्याख्यान में विचार रखे।

एएमयू के डॉ. एमयू रब्बानी ने हार्ट फेल्यर पर चर्चा की। फरीदाबाद के डॉ. एस राधाकृष्णन, डॉ. मानिक चोपड़ा तथा रांची के डॉ. विनीत महाजन ने रोबोटिक हार्ट सर्जरी के बारे में बताया। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने कहा कि यह कॉन्फ्रेंस सात साल के बाद यहां हो रही है। इस मौके पर कार्डियोलॉजी के निदेशक प्रोफेसर विनय कृष्णा, डॉ. रमेश ठाकुर, डॉ. राकेश वर्मा, डॉ. उमेश्वर पांडेय, डॉ. अवधेश शर्मा, डॉ. एसके सिन्हा, डॉ. एमएम रजी आदि रहे।

कोरोना बाद बच्चों, किशोरों को हो रही नई बीमारी
मुंबई के बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीनिवास एल. ने बताया कि कोरोना काल के बाद बच्चों में जापान की कावासाकी बीमारी की तरह नया रोग हो रहा है। यह हृदय भी खराब करता है। इसका नाम एमआईएससी (मल्टी इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम इन चिल्ड्रेन) रखा गया है। इसका कारण पता नहीं है। वर्ष 2020 से देश के मेट्रो शहरों में यह फैल रहा है। कोविड ठीक होने के डेढ़ महीने के बाद यह रोग ज्यादातर बच्चों को हुआ है। इसमें बुखार आता है। लाल चकत्ते, हाथों के जोड़ों में सूजन, जुबान में लाली और होठों पर लाली, सूजन आती है। इससे हृदय की धमनी में मोटापन आ जाता है। इलाज न करने पर हार्ट अटैक हो सकता है। समय से इलाज से रोग को नियंत्रित कर लिया जाता है।

कोरोना के बाद छह प्रतिशत बढ़े हार्ट अटैक के मामले
रांची से आए हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश कुमार ने बताया कि कोरोना के बाद हार्ट अटैक के मामले छह प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। यह माना जा रहा है कि कोविड को कोई न कोई वैरिएंट कम्युनिटी में फैला हुआ है। इसके अलावा युवाओं को अब दिल की बीमारी होने लगी है। इसके लिए पहले से एहतियात बरता जाना जरूरी है। लोग तंबाकू का सेवन न करें। योग,  प्राणायाम नियमित करें, संगीत सुनें। इसके साथ ही खानपान पर ध्यान रखें जिससे बीमारी पनपने न पाए। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण हृदय की धमनियों में खराबी पैदा कर दी है।
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रोबोटिक, हाइब्रिड सर्जरी अधिक सटीक
सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विनीत महाजन ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी से सटीक आपरेशन होता है। इसके साथ ही हाईब्रिड सर्जरी भी होने लगी है। इसमें हार्ट सर्जन और कार्डियोलॉजिस्ट दोनों साथ रहते हैं। इससे रोगी को अस्पताल में कम रुकना पड़ता है। इसके साथ ही रोगी की लाइफ क्वालिटी अच्छी रहती है। अभी रोबोटिक सर्जरी में बंगलूरू सबसे आगे हैं लेकिन यह दूसरे शहरों में भी शुरू हो रही है। जब अधिक स्थानों पर यह सर्जरी होने लगेगी तो रेट कम हो जाएंगे।

डीएम, एमसीएच के इन छात्रों को किया सम्मानित
- डॉ. वीरेंद्र यादव-लारी इंस्टीट्यूट लखनऊ
- डॉ. सोहम चौधरी-पीजीआई, लखनऊ
- डॉ. सूरज चतुर्वेदी-बीएचयू, वाराणसी
- डॉ. मनीष कुमार, एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट
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