एक डॉक्टर तो वर्षों से शेयर बाजार में पैसा लगा रहे थे
उस क्लोन एप को सिंगापुर से बनवाया गया था। यह क्लोन न सिर्फ असली एप की हूबहू दिखता था बल्कि ठीक उसी तरह काम भी करता था। डॉक्टरों ने कई बार ट्रेडिंग करके पैसा निकाला और फिर ज्यादा फायदा दिखने पर दोबारा ट्रेडिंग की। हैरत की बात यह है कि ठगी का शिकार एक डॉक्टर तो वर्षों शेयर बाजार में पैसा लगा रहे थे , लेकिन वह भी इन ठगों से गच्चा खा गए। वह ये भांप ही नहीं पाए कि साइबर अपराधी उनसे आगे की सोच रखते हैं।
अकाउंट में छह करोड़ से अधिक की रकम दिखने लगी
एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह कई वर्षों से शेयर बाजार में पैसा लगा रहे हैं। उनके पास तीन महीने पहले एक कॉल आया, जिसने एक नए शेयर ट्रेडिंग एप के फायदे बताकर उसे डाउनलोड करवाया। शेयर बाजार में पहले उन्होंने कुछ लाख रुपये लगाए, तो फायदा हुआ। एक बार चेक करने के लिए पैसे निकाले, तो वह फायदे के साथ मिल गए। 10 वर्ष से अधिक समय से चली आ रही पारिवारिक एफडी तुड़वा कर दो करोड़ रुपये जमा कर दिए। कुछ दिनों में ही शेयर ट्रेडिंग एप के अकाउंट में छह करोड़ से अधिक की रकम दिखने लगी।
लॉग इन करवाने के लिए एपीके फाइल बनाते थे
इस पर उन्होंने रकम निकालनी चाही, तो एकाउंट फ्रीज मिला। फिर सेबी का फर्जी लेटर दिखाकर एक करोड़ रुपये की मांग की गई। बताया गया कि यह रकम देने के बाद वह रकम निकाल सकते हैं। इस पर उन्हें ठगे जाने का अहसास हुआ और तब पुलिस की मदद ली। ठगी के शिकार एक अन्य डॉक्टर ने बताया कि साइबर ठग इस फर्जी एप पर लॉग इन करवाने के लिए एपीके फाइल बनाते थे और शेयर ट्रेडिंग के व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर करते थे। इससे लोग आसानी से झांसे में आ जाते।
अभी भी डॉक्टरों से मांगी जा रही रकम
करोड़ों की साइबर ठगी की एफआईआर होने के बावजूद भी डॉक्टरों से उनकी रकम निकाल देने के नाम पर एक करोड़ की मांग की जा रही है। डॉक्टरों के पास रोजाना व्हाट्सएप कॉल आ रहे हैं। इस पर उनसे उनकी रकम रिलीज कर देने की अंतिम तिथि बताकर अभी भी एक करोड़ की मांग की जा रही है।