रोगी की रिपोर्ट उर्सला में पॉजिटिव आई तो भी उसे नहीं गिना जा रहा। स्वास्थ्य विभाग ने उन डेंगू पॉजिटिव रोगियों को आंकड़ों में शामिल नहीं किया, जिनकी रिपोर्ट मेडिकल कालेज से क्रॉस चेक नहीं हुई।
कानपुर के उर्सला में डेंगू पॉजिटिव आए रोगी को भी स्वास्थ्य विभाग ने आंकड़ों में शामिल नहीं किया। रोगी शिवम सिंह की जांच उर्सला में हुई थी और बाद में हैलट में रोगी की मौत हो गई। इसके बाद भी आंकड़ों में डेंगू से मौत शून्य हैं। बिल्हौर की भी एक बच्ची की डेंगू से मौत हो चुकी है।
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विभाग यह कहता रहा है कि निजी पैथोलॉजियों की जांच को जीएसवीएम मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग या उर्सला की लैब से क्रॉस चेक कराया जाएगा। अब जब रोगी की रिपोर्ट उर्सला में पॉजिटिव आई तो भी उसे नहीं गिना जा रहा। स्वास्थ्य विभाग ने उन डेंगू पॉजिटिव रोगियों को आंकड़ों में शामिल नहीं किया, जिनकी रिपोर्ट मेडिकल कालेज से क्रॉस चेक नहीं हुई।
निजी पैथोलॉजियों ने भी रिपोर्ट जारी करने में खेल किया। रिपोर्ट में डेंगू पॉजिटिव लिखने के बजाए प्रोविजनल रिएक्टिव लिखना शुरू कर दिया। ज्यादातर नर्सिंगहोम रैपिड कार्ड से डेंगू की जांच कर रहे हैं, इस जांच को स्वास्थ्य विभाग ने मान्यता नहीं दी। इसी की आड़ में आंकड़े छिपाने का खेल चल रहा है।
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कुरसौली और आसपास के गांव के अंजान बुखार से मरे कई रोगियों की रिपोर्ट निजी अस्पताल में डेंगू पॉजिटिव रही है। इसके अलावा और भी कई रोगियों की रिपोर्ट निजी अस्पताल में पॉजिटिव थी, लेकिन बाद में जब स्वास्थ्य विभाग ने सैंपल लेकर जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई। डॉक्टरों का कहना था कि 10-12 दिन के गैंप में डेंगू निगेटिव हो गया। सीएमओ डॉ. नैपाल सिंह का कहना है कि मेडिकल कालेज में एलाइजा टेस्टिंग से पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर ही डेंगू रोगी माना जाएगा।