एलपीएस, ह्रदय रोग संस्थान, कानपुर
- फोटो : amar ujala
लखनऊ के एसजीपीजीआई में मिला था प्रवेश
गुरुवार को उसने दिन में ओपीडी की और शाम को इमरजेंसी में ड्यूटी के बाद घर गया था। जांच एजेंसियों के उसे हिरासत में लेने की अधिकारिक सूचना इंस्टीट्यूट को नहीं है। सारी जानकारी मीडिया से मिली है। उन्होंने बताया कि पहली काउंसलिंग में उसे लखनऊ के एसजीपीजीआई में प्रवेश मिला था। दूसरी काउंसलिंग में उसने एसजीपीजीआई छोड़कर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट को चुना और अगस्त 2025 में प्रवेश लिया।
डॉ. आरिफ का आधार कार्ड
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इस समय कश्मीर के चार छात्र पढ़ रहे हैं
डॉ. शर्मा ने बताया कि डॉ. आरिफ का स्वभाव सामान्य था और वह सामान्य डॉक्टर की तरह काम करता था। डॉ. शर्मा ने बताया कि इंस्टीट्यूट में इस समय कश्मीर के चार छात्र पढ़ रहे हैं। तीन छात्र पढ़ाई पूरी करके जा चुके हैं। हर साल जम्मू-कश्मीर से सुपर स्पेशियलिटी कोर्स में डीएम और एमसीएच के एक-दो छात्र प्रवेश लेते हैं। इनका चयन नीट-सुपर स्पेशियलिटी टेस्ट से होता है।
एलपीएस, ह्रदय रोग संस्थान, कानपुर
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इंस्टीट्यूट में उसका चाल-चलन ठीक रहा
उन्होंने बताया कि सभी छात्रों के लिए अभी छात्रावास की व्यवस्था नहीं है, तो शुरू में छात्र बाहर किराये का कमरा लेकर रहते हैं। डॉ. आरिफ अशोकनगर में रहता है। उसके साथ में उसका सहपाठी डॉ. अभिषेक भी रहता है। इंस्टीट्यूट में उसका चाल-चलन ठीक रहा है, लेकिन अन्य गतिविधियों की जानकारी नहीं है। उसके पिता का नाम गुलाम हसन मीर है। वह खागुंड, सादीवाड़ा वेरिनाग, अनंतनाग का रहने वाला है।