पुखरायां में क्रय विक्रय समिति क्रय केंद्र पर सन्नाटा। संवाद
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कानपुर देहात। गेहूं की सरकारी खरीद पर इस बार ग्रहण लगा रहा। न्यूनतम समर्थन मूल्य के सापेक्ष बाजार में गेहूं के दाम अधिक होने के चलते पंजीकरण करने के बाद भी किसान गेहूं बेचने क्रय केंद्र पर नहीं पहुंचे।
खरीद केंद्रों पर बोहनी तक के लाले पड़े तो अफसरों को गांवों में दौड़ाया गया। इसके बाद कुछ किसान गेहूं बेचने के लिए सहमत हुए। जनपद के 62 क्रय केंद्रों में से केवल 29 में गेहूं खरीद हुई। कुल मिलाकर 554.15 मीट्रिक टन गेहूं ही खरीदा जा सका। यह लक्ष्य का एक फीसदी है।
विपणन वर्ष 2022-23 में सरकार ने गेहूं खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल तय किया। जनपद में 55 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य दिया गया। गेहूं की फसल आने पर बाजार भाव 21 सौ रुपये के करीब थे।
ग्राम आढ़तियों ने खेत से किसानों का गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक पर खरीदना शुरू किया तो किसानों ने क्रय केंद्रों का रुख नहीं किया। एक मई तक 103 किसानों से कुल 499.75 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो सकी थी।
इधर 15 दिन में 12 किसानों से गेहूं की खरीद की गई। कुल 33 क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद की बोहनी नहीं हुई। बुधवार को अंतिम दिन होने पर क्रय केंद्र तो खुले लेकिन सन्नाटा रहा। केवल डेरापुर में खाद्य विभाग के क्रय केंद्र पर एक किसान से गेहूं की खरीद हुई। करीब डेढ़ हजार किसानों ने पंजीकरण कराया लेकिन केवल 115 किसान ही गेहूं बेचने क्रय केंद्र पर पहुंचे।
एमएसपी की तुलना में बाजार भाव अधिक होने से किसानों ने ग्राम आढ़तियों को अनाज बेचा। कुछ किसान ही क्रय केंद्रों पर गेहूं लेकर आए। क्रय केंद्र पर आने वाले किसानों से गेहूं की खरीद की गई। लक्ष्य का एक फीसदी ही खरीद हुई। - राघवेंद्र प्रताप सिंह, जिला खाद्य विपणन अधिकारी, कानपुर देहात।