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Kanpur Fire: महिला के बेटे का आरोप- एसओ ने आग में झोंकने का किया था प्रयास, गले नहीं उतर रही अफसरों की कहानी

Wed, 15 Feb 2023 11:39 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर

सार

कानपुर देहात में मैथा तहसील की मड़ौली ग्राम पंचायत के चालहा गांव के पीड़ित परिवार के बेटे अंकित ने बताया कि कार्रवाई के दौरान लेखपाल से बचने के लिए मां ने घर का दरवाजा बंद कर लिया था। इसके बाद लेखपाल ने झोपड़ी में पीछे की तरफ से जाकर बहन और मां के ऊपर डीजल डालकर आग के हवाले कर दिया। इसी दौरान जेसीबी से झोपड़ी ढहा दी गई। रूरा एसओ ने उन्हें भी आग में झोंकने का प्रयास किया था।
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कानपुर देहात मामला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर देहात में मैथा तहसील की मड़ौली ग्राम पंचायत के चालहा गांव में हुई सनसनीखेज घटना में नया मोड़ आ गया है। मृतक महिला के बेटे अंकित ने रूरा एसओ पर आग में झोंकने के प्रयास का आरोप लगाया है। घटना के बाद डीएम नेहा जैन ने मीडिया को बताया था कि कृष्ण गोपाल ने अतिक्रमण कर कमरा बनाया था। 
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शिकायत पर उसे हटा दिया गया। इसके बाद कृष्ण गोपाल ने वहीं पर झोपड़ी बना ली। इस पर एसडीएम मैथा को कार्रवाई के लिए कहा था। सामान हटाने के लिए महिला से कहा तो उन्होंने बेटी के साथ आग लगा ली। डीएम के इस बयान से ग्रामीणों में नाराजगी है। मौके पर पहुंचे प्रशासन के लोग भी यही बात बताते रहें, लेकिन प्रशासन की यह कहानी ग्रामीणों के गले नहीं उतरी। 

कृष्ण गोपाल ने बेटे अंकित ने बताया कि कार्रवाई के दौरान लेखपाल से बचने के लिए मां ने घर का दरवाजा बंद कर लिया था। इसके बाद लेखपाल ने झोपड़ी में पीछे की तरफ से जाकर बहन और मां के ऊपर डीजल डालकर आग के हवाले कर दिया। इसी दौरान जेसीबी से झोपड़ी ढहा दी गई। 
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रूरा एसओ ने उन्हें भी आग में झोंकने का प्रयास किया था। आग से मां और बहन को बचा नहीं पाए, इसलिए सरकारी हैंडपंप को उखाड़ दिया गया। वहीं, घटना के बाद ग्रामीण भी एकजुट दिखाई दिए। सभी ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाएं और कार्रवाई की मांग की।
 

आपको बता दें कि कानपुर देहात के मैथा तहसील की मड़ौली पंचायत के चाहला गांव में सोमवार की दोपहर को ग्राम समाज की जमीन से कब्जा हटाने पहुंची पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की टीम के सामने ही झोपड़ी के भीतर मां-बेटी जिंदा जल गए। दोनों को बचाने के प्रयास में गृहस्वामी व रुरा इंस्पेक्टर भी झुलस गए। आक्रोशित लोगों ने आग लगाने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। 

लेखपाल पर कुल्हाड़ी से हमला कर घायल कर दिया। अफसरों की टीम को दौड़ा लिया। भीड़ का गुस्सा देख टीम के अन्य लोग भाग खड़े हुए। बाद में गुस्साए लोगों ने एसडीएम, रुरा इंस्पेक्टर, तहसीलदार व लेखपाल समेत गांव के 10 लोगों पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज किए जाने की मांग करते हुए शवों को नहीं उठने दिया। 

घटना के बाद शाम को वायरल हुए वीडियो में नजर आया पूरा सच
वहीं, घटना का एक वीडियो सोमवार शाम सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें पूरा सच नजर आ रहा है। इस वीडियो में प्रमिला व उसकी बेटी शिवा जलती हुई झोपड़ी के अंदर सही सलामत मौजूद दिख रही है। जबकि, गेट के बाहर पुलिस प्रशासन दल-बल के साथ खड़ा नजर आ रहा है। इसके बाद भी दोनों महिलाओं की सबके सामने जलकर मौत हो गई।

 

वीडियो में प्रमिला बाहर से चिल्लाते हुए झोपड़ी के अंदर आते दिखी। इसके बाद जान देने की बात कहते हुए उसने अंदर से गेट बंद कर लिया। यह देखकर कुछ महिला सिपाही गेट के पास पहुंचीं और धक्का मारकर गेट खोल दिया। गेट खुलते ही अंदर रही प्रमिला चिल्लाते हुए सुनाई दे रही है कि इन लोगों ने आग लगा दी...। 
 
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उस वक्त आग सिर्फ छप्पर पर लगी नजर आ रही थी। जबकि, महिलाएं सकुशल खड़ी दिखीं। झोपड़ी में पीछे से भी अंदर जाने का रास्ता नजर आ रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि पुलिस के पास पर्याप्त समय होने के बाद भी महिलाओं को बचाने का प्रयास क्यों नहीं किया गया। वे तमाशबीन क्यों बने रहे...?
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