सरवनखेड़ा (देहात)। पनकी गंगागंज से तीन दिन पहले अगवा किए गए राजमिस्त्री की हत्या कर दी गई। शव खेत में दफना दिया गया। पनकी व कानपुर देहात पुलिस ने मंगलवार देर शाम गजनेर थाना क्षेत्र में स्थित खेत से शव को बरामद किया।
पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। वारदात में शामिल उसके दो भाइयों की तलाश जारी है। त्रिकोणीय प्रेम संबंध या अवैध संबंधों में हत्या की आशंका है। इन दोनों बिंदुओं पर पुलिस की तफ्तीश जारी है।
मूलरूप से चौबेपुर निवासी अरुण कुमार (29) पेशे से राजमिस्त्री थे। वह मकान की स्लैब की ढलाई का काम करते थे। अरुण पनकी कला में अपने भाई कुलदीप के साथ रहते थे। कुलदीप के मुताबिक 16 जुलाई को बिधनू के सपई गांव निवासी संदीप कश्यप ने उनके पास फोन कर अरुण से बात की थी।
मकान की स्लैब की ढलाई का काम दिलाने व 15 हजार रुपये एडवांस में दिलाने की बात कहकर उसको बुलाया था। उसके बाद अरुण लापता हो गया था। 17 जुलाई को कुलदीप ने पनकी थाने में अरुण की गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
एसीपी कल्याणपुर दिनेश कुमार शुक्ला ने बताया कि सर्विलांस की मदद से जांच करते हुए मंगलवार शाम संदीप के भाई अमित तक पुलिस पहुंची। पुलिस को देखकर अमित भागने लगा। जब पुलिस ने उसको दबोचा तो उसने वारदात कबूली।
उसने बताया कि भाई संदीप व पवन के साथ मिलकर 16 जुलाई को ही अरुण की गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसके बाद शव कानपुर देहात के गजनेर थानाक्षेत्र के गनगरौली गांव में स्थित खेत में दफना दिया था।
गजनेर पुलिस की मदद से पुलिस ने खेत में खुदाई करवाकर शव बरामद किया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इधर गुमशुदगी के केस को हत्या केस में तरमीम किया गया।
हत्या के पीछे दो वजहें, गहनता से जांच जारी
एसीपी कल्याणपुर ने बताया कि सपई गांव में अरुण की रिश्तेदारी है। इसलिए वह वहां जाता रहता था। इसी दौरान गांव निवासी एक युवती से उसके संबंध हो गए। कुछ साल बाद दोनों के संबंध खत्म हो गए। अरुण की शादी भी हो गई।
उसका एक बेटा भी है। इस युवती का संदीप से प्रेम प्रसंग हो गया। जानकारी के मुताबिक युवती ने अरुण के बारे में संदीप को बताया। यह भी बताया कि उसने दो तीन बार उसका गर्भपात भी कराया। जिसके बाद से संदीप अरुण से खुन्नस रखने लगा था और उससे बदला लेने की बात कहता था।
आशंका है कि इसी वजह से उसने उसकी हत्या दी। वहीं दूसरा पहलू यह है कि संदीप के भाई पवन की पत्नी से अरुण के अवैध संबंध हो गए थे। इस वजह से तीनों भाइयों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया। एसीपी ने बताया कि इन दोनों बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
पनकी पुलिस ने बरती लापरवाही
अरुण के भाई कुलदीप ने अरुण के लापता होने के दूसरे ही दिन पुलिस को जानकारी दी थी। नाम के साथ बताया था कि संदीप का उनके पास फोन आया था। उनके फोन से ही अरुण से उससे बात की थी। तब वहां से सपई गया था।
इसलिए सीधे तौर पर संदीप पर ही शक था, लेकिन पुलिस उस तक दो दिन बाद पहुंच सकी। सवाल है कि क्या इसके पीछे पनकी पुलिस की लापरवाही रही है। हालांकि जिस दिन अरुण लापता हुआ है उसी दिन उसकी हत्या कर दी गई थी। यानी जिंदा बचा पाना संभव नहीं था।
दस दिन से बंद था अरुण का मोबाइल
एसीपी ने बताया कि पकड़े गए आरोपी ने बताया कि उसके भाई पवन की पत्नी ने करीब दो सप्ताह पहले गहने किसी को दे दिए थे। शक था कि यह गहने उसने अरुण को दिए हैं, जबकि उसका कहना था कि टप्पेबाज गहने लेकर चला गया था।
इसको लेकर विवाद चल रहा था। इसकी जानकारी अरुण को भी थी। इसलिए वह पिछले दस दिन से अपना मोबाइल बंद किए हुए था। जब उसने उसके मोबाइल नंबर की सीडीआर निकाली तो युवती तक पहुंची। उसके जरिये संदीप के बारे में पूरी जानकारी हुई। फिर परतें खुलती गईं।