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बिकरू कांड : कोर्ट ने बचाव पक्ष का प्रार्थनापत्र खारिज कर लगाया 25 हजार रुपये का जुर्माना

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कानपुर देहात। बिकरू कांड के आरोपियों हुई गैंगस्टर की कार्यवाही के मामले में अदालत में आरोपियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इसी बीच अभियोजन के गवाहों से फिर जिरह करने की मांग करते हुए बचाव पक्ष ने प्रार्थनापत्र दिया था।
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इसे अदालत ने खारिज किया जा चुका है। पुन: उन्हीं आधारों पर अलग-अलग तिथियों पर बचाव पक्ष के प्रार्थना पत्र देने पर अदालत ने उन्हें खारिज कर दिया। साथ ही अदालत ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए अदालत की कार्यवाही बाधित करने पर बचाव पक्ष पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। अदालत ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 22 मार्च की तिथि नियत की है।

बिकरू कांड के बाद चौबेपुर पुलिस ने 30 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही की थी। इसकी सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-पांच गैंगस्टर कनिष्क कुमार सिंह की अदालत में चल रही हैं। मामले में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य समाप्त होने पर अब अदालत में आरोपियों के बयान दर्ज हो रहे हैं।
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मामले की सुनवाई दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता अश्वनी त्रिपाठी ने अदालत में तीन अभियोजन गवाहों से जिरह नहीं होने का हवाला देते हुए प्रार्थनापत्र पेश किया था। अदालत ने 23 फरवरी को उसे खारिज कर दिया था। फिर से उन्हीं आधारों पर बचाव पक्ष ने एक व 14 मार्च को अदालत में प्रार्थना पत्र दखिल किए थे। इनको भी अदालत ने खारिज कर दिए था।

इसके बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने 18 मार्च को प्रार्थना पत्र पेश करते हुए दलील दी कि वह महीने की 15 से लेकर 30 तारीख तक उत्तर प्रदेश में रहते हैं। शेष दिन वह दिल्ली में वकालत करते हैं। इसलिए मामले में उनकी उपस्थिति के अनुसार तारीख लगाई जाए। साथ ही अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में एक दाखिल याचिका में आदेश आने तक मामले की कार्यवाही को स्थगित रखा जाए।

इसका अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता विशेष लोक अभियोजक अमर सिंह भदौरिया ने विरोध किया। साथ ही अदालत को बताया कि बचाव पक्ष ने मामले को लंबित करने के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा था।

वहीं, विशेष लोक अभियोजक अमर सिंह भदौरिया ने बताया कि बुधवार को अदालत ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता पर एक ही आधार पर बार-बार प्रार्थना पत्र देकर न्यायालय का समय बर्बाद करने व मामले की कार्यवाही को बाधित करने पर सख्त नाराजगी जताई। साथ ही बचाव पक्ष का प्रार्थना पत्र खारिज करते हुए 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।

जुर्माना की धनराशि एक सप्ताह में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करने के आदेश दिए हैं। अब शेष आरोपियों के बयान दर्ज करने के लिए अदालत ने 22 मार्च की तिथि नियत की है। इस दौरान जिन सात आरोपी के बयान दर्ज होने शेष है। वह अदालत में मौजूद रहे। अन्य आरोपियों को तलब नहीं किया जा रहा है।
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