कानपुर देहात। भाजयुमो के पूर्व जिला उपाध्यक्ष की हत्या के षड्यंत्र में फंसे अधिवक्ता के एक और कारनामे का खुलासा हुआ है। अधिवक्ता ने नियमों को ताक पर रखकर सात फरवरी 2015 को शत्रु संपत्ति का बैनामा करा दिया। जबकि शत्रु संपत्ति की बिक्री नहीं की जा सकती है।
पुखरायां में भाजयुमो के पूर्व जिला उपाध्यक्ष अमरेश तिवारी की हत्या के षड्यंत्र में फंसे अधिवक्ता पुष्कल पराग दुबे के निशाने पर हमेशा विवादित जमीनें रहीं। जमीनों को हड़पने के लिए वह नियम कानून तोड़ने व सरकारी कर्मचारियों को साथ मिलाने में माहिर हैं।
ऐसा ही एक मामला भोगनीपुर तहसील के मावर गांव में सामने आया है। वर्ष 1971 में पाकिस्तान जाकर वहां की नागरिकता ले चुकीं जाफरी बेगम की मावर गांव स्थित अराजी संख्या 785 व 787/2 में 0.8090, 0.8190 हेक्टेयर जमीन थी।
उनके जाने के बाद गांव के कुछ लोगों ने अधिवक्ता से सांठगांठ करके वर्ष 2015 में उन्हें मृत दिखाकर फर्जी वसीयत के आधार पर करोड़ों की जमीन अपने नाम करा ली। मावर निवासी रहीस को इसमें बिना बताए गवाह बना दिया गया।
वर्ष 2019 में रहीस को जानकारी हुई तो तहरीर देकर उसने 23 मई को भोगनीपुर कोतवाली में गांव के ही एजाज, सदरूल इस्लाम, फरहाना पर धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई। तहरीर में अधिवक्ता पुष्कल पराग दुबे का भी नाम था, लेकिन उसके प्रभाव के चलते पुलिस ने नामजद नहीं किया था।
इसके बाद मामला अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचा। वहीं पुलिस ने विवेचना में अधिवक्ता पुष्कल पराग दुबे की भूमिका महत्वपूर्ण पाई। इस पर अधिवक्ता को शामिल करते हुए मामले में चार्जशीट लगा दी। अधिवक्ता ने खुद को निर्दोष बता दोबारा विवेचना कराई तो दूसरे विवेचक ने भी उनका नाम जोड़ा। (संवाद)
तैयार कराई थी फर्जी वसीयत
जाफरी बेगम के नाम वर्ष 2004 में एक वसीयत तैयार कराई गई। साथ ही उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी लगा दिया गया। अब सवाल ये उठता है 1971 में पाकिस्तान जा चुकी महिला का भोगनीपुर से मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे बन सकता है। महिला की भूमि शत्रु संपत्ति में दर्ज होने के बाद इसकी बिक्री कैसे हो सकती है।
वर्ष 2007 में भारत घूमने आई थी जाफरी बेगम
पाकिस्तान जाने के बाद वहां की नागरिकता लेकर जाफरी बेगम परिवार सहित वहीं रहने लगीं। वर्ष 2007 में एक बार भारत घूमने आई थीं। इसका विवरण कानपुर स्थित पासपोर्ट दफ्तर में दर्ज है। वह कुछ दिन ठहरने के बाद वे वापस चली गई थीं। इस बात के प्रमाण भी हैं। इधर जालसाजों ने जाफरी बेगम को 2004 में मृत दर्शा दिया।