ईमेल पर भी कोई जवाब नहीं आया
आरोप है कि अधिकारियों ने उनके रजिस्ट्रेशन, एग्रीमेट, सर्टिफिकेट के नाम पर 16 जनवरी से तीन फरवरी 2025 के बीच छह बार में 17.49 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए जमा करा लिए। जालसाजों ने उन्हें कॉल कर पांच फरवरी को ऑडिट के लिए अधिकारियों के आने की बात कही। काफी इंतजार के बाद जब उन्होंने उनके नंबर पर कॉल की, तो उनका मोबाइल बंद मिला। वहीं ईमेल पर भी कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने ठगी का अहसास होने पर एफआईआर कराई।
शातिरों ने छह अकाउंट में मंगाए रुपये
कारोबारी ने बताया कि शातिरों ने 16 जनवरी से तीन फरवरी के बीच छह बार में रुपये मंगाए थे। उन्होंने यह रकम किरानाकार्ट टेक्नोलॉजिस प्राइवेट लिमिटेड के बैंक ऑफ महाराष्ट्र और बंधन बैंक के खाते में भेजे। सारे रुपये आरटीजीएस के जरिए जमा किए थे।
कंपनी के कर्मचारी के शामिल होने की संभावना
कारोबारी के मुताबिक उनके पास ई-कॉमर्स कंपनी के ऑफिशियल आईडी से मेल आया था। उन्होंने विश्वास करके उनके द्वारा बताए गए फार्मेट को पूरा किया। रुपये जमा करने के बाद जब ईमेल से कोई जवाब नहीं मिला तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ। इसमें कंपनी के किसी कर्मचारी के शामिल होने की संभावना है।