फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kanpur: स्टोर खोलने का झांसा देकर कारोबारी से 17.49 लाख ठगे, ई-कॉमर्स कंपनी के नाम पर ईमेल भेज किया खेल

Sat, 24 May 2025 10:52 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: इंस्पेक्टर सुनील वर्मा ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच चल रही है। संबंधित बैंकों से पत्राचार कर खाता फ्रीज कराने का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
ई-कॉमर्स वेबसाइट के नाम पर ठगी - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कानपुर में साइबर अपराधियों ने ई-कॉमर्स कंपनी का स्टोर खोलने का झांसा देकर कारोबारी से 17.49 लाख रुपये ठग लिए। उन्होंने साइबर थाने में एफआईआर कराई है। पुलिस ने जिन खातों में रुपये भेजे गए हैं, उनको फ्रीज कराने का प्रयास शुरू कर दिया है। सरोजनीनगर निवासी कारोबारी पंकज अरोड़ा ने बताया कि पिछले साल 18 दिसंबर को उनकी ईमेल आईडी पर नामी ई-कॉमर्स कंपनी की आईडी से एक मेल आई।

विज्ञापन

उसमें कंपनी का डार्क स्टोर खोलने के लिए फार्म था। उन्होंने मेल पर ही फार्म भरने के साथ ही गोदाम की लोकेशन और फोटो मेल के माध्यम से भेज दी। कुछ देर बाद कंपनी की तरफ से आवेदन पास होने का ईमेल आया था। उनसे रजिस्ट्रेशन फार्म भरने के साथ ही 49.56 हजार निफ्ट के जरिए जमा करने की बात कही। कंपनी की ओर से दो अधिकारी भी नियुक्त किए गए, जिन्होंने अपना नाम राज कुमार तिवारी और सौरभ अग्रवाल बताया।

ईमेल पर भी कोई जवाब नहीं आया
आरोप है कि अधिकारियों ने उनके रजिस्ट्रेशन, एग्रीमेट, सर्टिफिकेट के नाम पर 16 जनवरी से तीन फरवरी 2025 के बीच छह बार में 17.49 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए जमा करा लिए। जालसाजों ने उन्हें कॉल कर पांच फरवरी को ऑडिट के लिए अधिकारियों के आने की बात कही। काफी इंतजार के बाद जब उन्होंने उनके नंबर पर कॉल की, तो उनका मोबाइल बंद मिला। वहीं ईमेल पर भी कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने ठगी का अहसास होने पर एफआईआर कराई।

शातिरों ने छह अकाउंट में मंगाए रुपये
कारोबारी ने बताया कि शातिरों ने 16 जनवरी से तीन फरवरी के बीच छह बार में रुपये मंगाए थे। उन्होंने यह रकम किरानाकार्ट टेक्नोलॉजिस प्राइवेट लिमिटेड के बैंक ऑफ महाराष्ट्र और बंधन बैंक के खाते में भेजे। सारे रुपये आरटीजीएस के जरिए जमा किए थे।
विज्ञापन

कंपनी के कर्मचारी के शामिल होने की संभावना
कारोबारी के मुताबिक उनके पास ई-कॉमर्स कंपनी के ऑफिशियल आईडी से मेल आया था। उन्होंने विश्वास करके उनके द्वारा बताए गए फार्मेट को पूरा किया। रुपये जमा करने के बाद जब ईमेल से कोई जवाब नहीं मिला तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ। इसमें कंपनी के किसी कर्मचारी के शामिल होने की संभावना है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें