कानपुर में वर्षों से तमाम कारखानों का प्रदूषित कचरा ढोकर गंगा में डाल रही पांडु नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त करने के लिए चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) ने प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस प्रोजेक्ट को केंद्र की अनुमति के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को भी भेज दिया गया है।
प्रोजेक्ट के माध्यम से सिर्फ नदी के पानी को ही साफ नहीं किया जाएगा बल्कि भूगर्भ जल को भी साफ किया जाएगा ताकि नदी के पास रहने वाले लोगों को साफ पानी मिल सके। प्रोजेक्ट के अनुसार पांडु नदी में गिरने वाले फैक्ट्रियों के कचरे और नालों के प्रदूषित पानी को साफ करने के लिए नदी के किनारे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी स्थापित किया जाएगा।
जिससे पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त किया गया पानी सिंचाई के लिए किसानों को दिया जाएगा। पहले चरण में यह कार्य कानपुर से फतेहपुर के बीच किया जाएगा। इसी तरह नदी के आसपास के क्षेत्रों को भी प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए वहां पर बड़ी संख्या में पौधे भी लगाए जाएंगे। किसानों को व्यवसायिक खेती के लिए भी प्रशिक्षित किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में आईसीआरआईएसएटी (इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर सेमी एरिड ट्रॉपिक्स) हैदराबाद भी सहयोग कर रहा है।
11 विशेषज्ञों की बनाई गई टीम
पांडु नदी का प्रदूषण दूर करने के लिए बनाए गए प्रोजेक्ट के लिए सीएसएए कानपुर के पांच और हैदराबाद के 6 विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है। जिसका नेतृत्व कुलपति डीआर सिंह कर रहे हैं।
पांडु नदी के जरिए पिछले काफी समय से गंगा में बड़ी मात्रा में प्रदूषित कचरा गिर रहा है। जिसे दूर करने के लिए सीएसए की तरफ से एक प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। जैसे ही इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार की अनुमति मिल जाती है, कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
डीआर सिंह कुलपति सीएसए व सदस्य वाटर पॉलिसी कमीशन यूपी