कुटरा पीएचसी में मरीजों का इलाज कर रहे फार्मासिस्ट
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पंचायत चुनावों के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण और बुखार का कहर बरपा। अब कोरोना की तीसरी लहर और खतरनाक होने के संकेत मिल रहे हैं। इससे निपटने के स्वास्थ्य विभाग के दावे तो हजार हैं, पर गांवों में सब हवा में है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का आधार माने जाने वाले पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) महज टीकाकरण केंद्र बनकर रह गए हैं।
ये पहली और दूसरी लहर में काम नहीं आए और तीसरी में भी इनकी उपयोगिता सवालों के घेरे में है। घाटमपुर ब्लॉक के बीबीपुर और कुटरा पीएचसी का तो यही हाल है। ये दोनों अस्पताल फार्मासिस्ट के भरोसे हैं। वहीं बरीपाल पीएचसी की कमान वार्ड ब्वॉय के हाथों में है। पीएचसी की ओपीडी ठप होने से ग्रामीण मजबूरन झोलाछाप से इलाज कराने को मजबूर हैं।
चिकित्सक की इमरजेंसी ड्यूटी, ओपीडी ठप
सुबह करीब 11:39 बजे पीएचसी बरीपाल के अंदर सन्नाटा था। कोविड वैक्सीन कोल्ड चेन रूम में तैनात हैंडलर जीवन प्रकाश ड्यूटी पर मिले। वार्ड ब्वॉय ने बताया कि पीएचसी में तैनात डॉ. संदीप गुप्ता सीएचसी के इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी लगने की वजह से नहीं आ सके। वार्ड ब्वॉय यहां पहुंचने वाले मरीजों का इलाज कर दवाएं देता है।
चिकित्सक नहीं, फार्मासिस्ट करता है इलाज
दोपहर करीब 12:41 बजे पीएचसी बीबीपुर का गेट खुला था। फार्मासिस्ट अमर सिंह और वार्ड ब्वॉय संतोष पांडेय पेड़ केे नीचे बैठे एक मरीज से बात कर रहे थे। फार्मासिस्ट ने बताया कि पीएचसी में संविदा चिकित्सक डॉ. आरती सचान की तैनाती है। फार्मासिस्ट चिकित्सक की अनुपस्थिति का कारण नहीं बता सका। उन्होंने बताया कि मैडम कल आईं थीं, किसी कारणवश आज नहीं आ सकीं। यहां दवाओं की किल्लत नहीं है। हालांकि, साफ-सफाई की व्यवस्था खराब है। बरीपाल सीएचसी में तैनात सफाईकर्मी की तीन दिन ड्यूटी यहां लगाई गई है, लेकिन बेड और वार्ड धूल से भरे नजर आए।