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कानपुर: अखंड शिवधाम में अशांति के पीछे करोड़ों की संपत्ति, दोनों पक्ष चाहते हैं कब्जा

Sat, 29 May 2021 12:17 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

बिठूर के लवकुश नगर स्थित आश्रम एक बीघे में बना है। आश्रम के महंत स्वामी प्रकाशानंद के निधन के बाद से कब्जे को लेकर विवाद चल रहा है। आश्रम की कीमत चार से पांच करोड़ बताई जा रही है।
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बिठूर लवकुश नगर स्थित शिवधाम आश्रम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में बिठूर के लवकुश नगर स्थित शिवधाम आश्रम में महंत स्वामी प्रकाशानंद के निधन के बाद उपजी अशांति की वजह करोड़ों रुपये की संपत्ति बनी है। आश्रम एक बीघे से अधिक जमीन पर बना है। इलाके में प्रचलित दर के हिसाब से सिर्फ जमीन की ही कीमत दो से ढाई करोड़ है।
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इतनी ही रकम भव्य आश्रम के निर्माण में भी लगी होने का अनुमान है। इस तरह सारी संपत्ति चार से पांच करोड़ की कीमत की बैठती है। यही वजह है कि दो पक्ष इस पर अपना दावा पेश कर रहे हैं। विवाद पुलिस-प्रशासन के पास पहुंच गया है।

पुलिस ने यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश देते हुए प्रशासनिक अफसरों को भी इसकी जानकारी दी है। आश्रम पर कब्जे के लिए गुरुवार से विवाद और धरना-प्रदर्शन चल रहा है। इसे देखते हुए मौके पर पुलिस तैनात कर दी गई है। महंत ब्रजानंद अवधूत बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ शुक्रवार को भी आश्रम में डटे रहे।
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दूसरी तरफ डॉ. रेनू तिवारी ने भी दावा किया है कि आश्रम के उत्तराधिकारी संबंधी दस्तावेज उनके पास हैं। खींचतान के बीच मामले में पुलिस-प्रशासन को दखल देना पड़ा है। अब दोनों पक्षों की ओर से पेश किए जा रहे दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इसमें जिसके कागजात सही होंगे, उसे ही आश्रम का कब्जा मिलेगा।
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70 कमरे, भवन और परिसर
आश्रम में 70 कमरों समेत अन्य भवन और परिसर हैं। स्थानीय प्रॉपर्टी डीलरों के मुताबिक, इसकी कीमत पांच करोड़ से भी अधिक हो सकती है। डीसीपी पश्चिम संजीव त्यागी का कहना है कि दोनों पक्षों को किसी भी सूरत में कानून का उल्लंघन न करने की हिदायत दी गई है। दोनों से साक्ष्यों और दस्तावेज के साथ पक्ष रखने को कहा गया है। इसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस तरह दोनों पक्ष कर रहे दावे
महंत ब्रजानंद ने बताया कि वर्ष-2015 में दिवंगत स्वामी प्रकाशानंद ने श्री अखंड शिवधाम नाम से ट्रस्ट बनाया था। खुद स्वामी प्रकाशानंद इसके अध्यक्ष थे। ब्रजानंद के मुताबिक, वह और चित्रकूट पीली कोठी के महंत दिव्यानंद महाराज इस ट्रस्ट के सदस्य हैं।

अब स्वामी प्रकाशानंद के बाद आश्रम की देखभाल की जिम्मेदारी ट्रस्ट के सदस्यों की है। आश्रम में साधु-संत रह सकते हैं। गृहस्थ जीवन वालों के लिए नहीं। वहीं, डॉ. रेनू तिवारी का कहना है कि दिवंगत प्रकाशानंद ने उन्हें आश्रम संस्था का अध्यक्ष नियुक्त किया था। इसके कागजात मेरे पास हैं। मामले की जांच होगी तो अफसरों को दस्तावेज और अन्य साक्ष्य देंगे। 
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