तत्कालीन एसओजी प्रभारी ऋषिकांत शुक्ला, इंस्पेक्टर बृजवीर सिंह की टीम को गिरफ्तार करने में सफलता मिली थी। अभय सिंह और उसके साथियों को दबोचने वाली टीम में रहे एक पुलिस अफसर ने बताया कि माफिया मुख्तार अंसारी का पूर्वांचल में स्क्रैप लेकर से कोयला कारोबार में सिक्का चलता था। उसकी जड़ें बिहार तक फैली थी। वह कानपुर में भी पर फैलाना चाहता था। उसने इसके लिए छात्र राजनीति का सहारा लिया। लेकिन गिरफ्तारी से मोहम्मद ताहिर व मुख्तार अंसारी के रिश्तों का खुलासा हो गया था।
डी-टू गैंग के रफीक के तार भी मुख्तार से जुड़े होने की बात आई थी सामने
डी-टू गैंग के रफीक के तार भी पूर्वांचल के माफिया मुख्तार अंसारी से जुड़े होने की बात पुलिस की जांच में सामने आई थी। तब पुलिस अफसरों ने कानपुर जेल में तैनात जेल अधीक्षक राजेश कुमार केसरवानी से इन दोनों के साथ ही अभय सिंह से खुन्नस होने की बात कही थी। एक मामले में लखनऊ जेल में बंद मुख्तार अंसारी की वहां तैनात रहे जेल अधीक्षक केसरवानी से झड़प हो गई थी।
इसके बाद केसरवानी की कानपुर जेल में तैनाती हुई। तब डी टू गैंग के अतीक, शफीक, रफीक और अफजाल जेल में बंद थे और उनका जेल में सिक्का चलता था। जेल से ही पूरा गैंग संचालित होता था। केसरवानी के कार्यभार संभालने के बाद डी टू के अतीक गैंग पर नकेल कस गई थी। इसी बात से रफीक नाराज था। लखनऊ जेल में बंद रहने वाले दौरान अभय की अंदर लगने वाली पंचायतों पर भी केसरवानी ने रोक लगा दी थी। इसके चलते केसरवानी से मुख्तार, रफीक और अभय तीनों की खुन्नस होने की बात सामने आई थी। इनके टारगेट पर केसरवानी थे, इसलिए उन्हें एक गनर भी मिला था।