Kanpur Complex Fire Incident: कोपरगंज अग्निकांड के दो साल पूरे हो गए हैं। अग्निकांड की आंच में व्यापारी आज भी तप रहे हैं। तबाह हुए कारोबारी फिर से अपना मुकाम हासिल करने में लगे हैं।
30 मार्च 2023 की रात शहर की रेडीमेड-होजरी कपड़ों की सबसे बड़ी मंडी में शहर का सबसे बड़ा अग्निकांड हुआ था। इसमें पांच टावर आग की चपेट में आ गए थे। आग को बुझाने में पांच दिन से ज्यादा का समय लगा था। अग्निकांड में 570 से ज्यादा कारोबारियों की एक हजार से ज्यादा दुकानें जल गई थीं। करीब 2500 करोड़ का नुकसान हुआ था। अग्निकांड के दो साल बीत चुके हैं। कारोबारी फिर से आगे बढ़ने की कोशिश में लगे हुए है। किसी भी प्रकार की सरकारी मदद न मिलने की टीस और नाराजगी भी है। सरकार से लेकर जनप्रतिनिधियों ने तमाम वादे किए थे जो वादे ही बनकर रह गए हैं। पेश है अमित अवस्थी की रिपोर्ट...
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प्लाट बेचकर फिर से शुरू किया काम
रंजीतनगर में रहने वाले कारोबारी रमेश कुमार दुसेजा ने बताया कि उनकी और परिवार के लोगों की एआर और मसूद कांप्लेक्स में 26 दुकानें थीं। सभी आग में जलकर राख हो गईं और करोड़ों का नुकसान हुआ। बच्चों के लिए रखे गए प्लाट को बेचकर फिर से काम शुरू किया है। धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। कारोबार बढ़ने में वर्षों लगेंगे, लेकिन हौसला नहीं छोड़ा है।
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कॉम्प्लैक्स अग्निकांड की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
आज तक सरकार की ओर से सब्सिडी तक नहीं मिली
कारोबारी भूपेंद्र सिंह राजा ने बताया कि एआर और मसूद कांप्लेक्स में दुकानें थीं। पिछले साल एक जिला एक उत्पाद के तहत 20 लाख के लोन का आवेदन किया था। केवल 10 लाख का ही लोन स्वीकृत हुआ। आज तक सरकार की ओर से सब्सिडी तक नहीं मिली। पहले दुकानों के मालिक थे, अब किराये पर दुकानें लेकर कारोबार कर रहे हैं।
कॉम्प्लैक्स अग्निकांड की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
कारोबारियों के लिए अग्निकांड बहुत बड़ी त्रासदी था। 570 से ज्यादा कारोबारियों की एक हजार से ज्यादा दुकानें जल गई थीं। अग्निकांड से तबाह हुए व्यापारी फिर से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। कई ने घर गिरवी रखकर लोन लेकर काम शुरू किया है। एआर और मसूद कांप्लेक्स की नई बिल्डिंग के लिए नक्शा दाखिल किया जा चुका है। - सरदार गुरुजिंदर सिंह, संरक्षक, यूपी, गारमेंट मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन
कारोबारी खुद ही आगे बढ़ रहे हैं। शासन और जिला प्रशासन ने एक साल बीतने के बाद भी किसी प्रकार का मुआवजा नहीं दिया है। कमेटी जरूर बना दी गई थी। जिन लोगों ने अपने दस्तावेज जमा किए थे, उन्हें तो मुआवजा मिलना चाहिए था। डिप्टी सीएम से कारोबारी 20 से ज्यादा बार मिल चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। मुआवजा के लिए जिला प्रशासन ने कमेटी बनाई थी।- मनीष वसंदानी, चेयरमैन, अरजन कांप्लेक्स मर्चेंट एसोसिएशन
कॉम्प्लैक्स अग्निकांड की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
सुपर हमराज और नफीस की मरम्मत में लगेंगे छह माह
अग्निकांड में जले हमराज कांप्लेक्स की नई बिल्डिंग निर्माण पर अब तक कोई फैसला नहीं हो सका है। इसकी स्थापना 1986 में हुई थी। पहले दिल्ली और मुंबई में सिले कपड़े शहर में बिकने आते थे। बाद में यहां के बने कपड़े दिल्ली, मुंबई, कोलकाता के बाजारों की शान बन गए। हमराज के बनने के बाद मसूद टावर बना। इसके बाद नफीस टावर, फिर एआर टावर बना। बाद में सुपर हमराज बना। सबसे बाद में अरजन कांप्लेक्स बना। सुपर हमराज और नफीस टावर की मरम्मत का काम एचबीटीयू की टीम की देखरेख में हो रहा है। हालांकि काम पूरा होने में 6 महीने का समय लगेगा।