दो साल से रिंग रोड के तीसरे चरण के निर्माण में बाधा बन रही छतमरा और टिगरा पैगंबर गांव की जमीन मंगलवार को प्रशासन ने कब्जा मुक्त करा ली। रिंग रोड के लिए 1.800 किलोमीटर लंबाई में चयनित भूमि पर बने निर्माणों और खड़ी फसल पर प्रशासन का बुलडोजर गरजा। इस दौरान महिलाओं और किसानों ने काफी विरोध किया, लेकिन पुलिस और प्रशासन की सख्ती के आगे किसी की न चली। भूमि का समतलीकरण होने के बाद कंपनी ने निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की 93.20 किलोमीटर लंबी महत्वाकांक्षी परियोजना रिंग रोड के पैकेज-एक में सचेंडी से मंधना व पैकेज-चार में रमईपुर से सचेंडी और पैकेज तीन में रमईपुर से आटा तक का निर्माण कार्य चल रहा है। पैकेज तीन में नर्वल तहसील के छतमरा और टिगरा पैगंबर गांव की नौ हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण का करीब 40 से अधिक किसान विरोध कर रहे थे। बीते दो साल से उन्हें मनाने के लिए जिला प्रशासन प्रयास कर रहा था। किसान सर्किल रेट का चौगुना मुआवजा देने की मांग पर अड़े थे। किसानों को सरकार दोगुना मुआवजा दे रही थी। इसमें करीब 80 से अधिक किसान पहले मुआवजा ले चुके थे।
मौके पर मौजूद फोर्स
- फोटो : अमर उजाला
कुछ किसानों के चक्कर में रिंग रोड का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा था। शासन स्तर से लगातार जमीन अधिग्रहित करने पर जोर दिया जा रहा था। इस मामले की जानकारी डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह को दी गई। उन्होंने शासन स्तर पर चर्चा की। इसके बाद डीएम के निर्देश पर एडीएम भूमि संतोष कुमार, एसडीएम नर्वल विवेक मिश्रा, नायब तहसीलदार आशीष पटेल व एनएचएआई अधिकारियों की टीम मंगलवार को पुलिस फोर्स के साथ गांव पहुंची। चारों तरफ पुलिस ने पहरा लगा दिया। इसके बाद जमीन पर खड़ी बाउंड्रीवाल और अन्य निर्माण बुलडोजर से तोड़ना शुरू कर दिया। यह देख गांव के किसान और महिलाएं विरोध करने पहुंच गए। अफसरों से काफी नोकझोंक हुई। काफी समझाने के बाद लोग शांत हुए।
मौके पर लगी भीड़
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पहले ही दी थी एनएचएआई ने हिदायत, नहीं माने किसान
रिंग रोड के लिए चयनित भूमि को अधिग्रहित करने के बाद भी किसान वहां पर फसल बुआई के साथ निर्माण कार्य करा रहे थे। एनएचएआई अधिकारियों ने कई बार उन्हें नोटिस जारी कर अधिग्रहित जमीन खाली करने के निर्देश दिए थे, लेकिन किसान मान नहीं रहे थे। इसके बाद प्रशासन को जबरन कार्रवाई करने को मजबूर होना पड़ा।