फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

साइबर ठगों को सिम देने वाले गिरोह का पर्दाफाश: फर्जी आधार बना एक्टिव किए 11 हजार सिम, अपराध में हुए इस्तेमाल

Tue, 08 Feb 2022 04:45 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि गोविंद नगर ई-ब्लॉक निवासी सगे भाई हर्षित मिश्रा व अभिषेक मिश्रा को गिरफ्तार किया गया है। हर्षित एमएससी और अभिषेक बीएससी पास है। दोनों वोडा आइडियां (वीआई) टेलीकॉम कंपनी के सिम बेचते हैं। एक एजेंसी इन दोनों के नाम पर है और दूसरी उनके पिता के नाम पर है। 
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : YakobchukOlena
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

क्राइम ब्रांच ने प्रीएक्टिवेटेड सिम बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड बनाकर 11 हजार से अधिक सिम एक्टिवेट किए। उसके बाद देश भर के साइबर ठगों के अलावा अन्य तमाम अपराधियों को ये प्री-एक्टिवेटेड सिम बेचे गए। 
विज्ञापन


दिल्ली, राजस्थान से लेकर बिहार, बंगाल और जामताड़ा के साइबर ठग इन्हीं सिमों का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए क्राइम ब्रांच की एक टीम तफ्तीश कर रही है।

डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि गोविंद नगर ई-ब्लॉक निवासी सगे भाई हर्षित मिश्रा व अभिषेक मिश्रा को गिरफ्तार किया गया है। हर्षित एमएससी और अभिषेक बीएससी पास है। दोनों वोडा आइडियां (वीआई) टेलीकॉम कंपनी के सिम बेचते हैं। एक एजेंसी इन दोनों के नाम पर है और दूसरी उनके पिता के नाम पर है। 
विज्ञापन


आरोपी एक वेबसाइट के जरिये फर्जी आधार कार्ड बनाते थे। एक शख्स की फोटो लगाकर दूसरे का नाम पता लिखकर सैकड़ों आधार कार्ड बनाए हैं। इन फर्जी आधार पर कंपनी से सिम एक्टिव करवा लेते थे। उसके बाद धड़ल्ले से बेचते थे। पिछले कई वर्षों से ये फर्जीवाड़ा आरोपी कर रहे थे। आरोपियों के पास से 800 फर्जी आधार कार्ड, 547 प्रीएक्टिवेटेड सिम, 7 फिंगर प्रिंट डिवाइस, दस मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, एक प्रिंटर बरामद हुआ। 
Trending Videos
विज्ञापन

किसी को भी बेच देते थे सिम

जो लोग उनके पास से सिम लेने आते थे उनकी फोटो आरोपी सेव कर लेते थे। फिर इन फोटो का इस्तेमाल कर वेबसाइट की मदद से फर्जी आधार बनाते थे। उसका प्रिंट भी निकालते थे। कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद सिम एक्टिव कराते थे। डीसीपी ने बताया कि जो भी शख्स आरोपियों के पास जाकर बगैर आईडी के एक्टिवेट सिम मांगता था उनको ये इसी तरह की फेक आईडी पर लिए गए सिम 400 से 500 रुपये तक में बेच देते थे।

ऐसे हुआ गिरोह का खुलासा 
चकेरी निवासी ट्रांसपोर्टर शानू खान से 17 नवंबर को 20 हजार रुपये की साइबर ठगी हुई थी। क्राइम ब्रांच ने जब ठग के नंबर की पड़ताल की तो पता चला कि नंबर कानपुर की आईडी पर है। ये नंबर जिस मोबाइल से एक्टिव हुआ था वह हर्षित व अभिषेक का निकला। तब दोनों को पुलिस ने पकड़ लिया। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें