उखड़ जाते थे प्लास्टिक या पेपर टेप
इसके बाद इस बस को खड़ा करा दिया गया था। इस मामले को रोडवेज ने गंभीरता से लिया है। बसों में अब तारकोल, प्लास्टिक व पेपर टेप की जगह एल्युमीनियम के वाटर प्रूफिंग टेप लगाए जा रहे हैं। गर्मी में तारकोल पिघल जाता था और छत टपकती थी। वहीं प्लास्टिक या पेपर टेप उखड़ जाते थे।
मंडल में 664 बसें
झकरकटी बस अड्डा से दिल्ली, आगरा, बांदा, रायबरेली, गोरखपुर, हरदोई सहित अन्य शहरों के लिए बसें संचालित होती हैं। कानपुर रीजन में 664 रोडवेज बसें हैं। इनमें से 112 ऐसी हैं जो 10 साल की मियाद पूरी कर चुकी हैं या 11 लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं।
बारिश को देखते हुए बसों की छतों पर एल्युमीनियम वाटर प्रूफिंग टेप लगाया जा रहा है। यह अधिक सुरक्षित है। अब तक कानपुर मंडल की 162 बसों में इसे लगाया जा चुका है। शिकायत आने पर अन्य बसों में भी लगाया जाएगा। अभी 256 बसें नई हैं जो अंडर वारंटी हैं। -गोकरन सिंह, सर्विस मैनेजर, फजलगंज वर्कशॉप