हटा दी गई है आधार नामांकन आईडी फील्ड
इस बदलाव से छोटे निवेशकों के लिए रिटर्न प्रक्रिया आसान हो गई है। उन्होंने बताया कि कि आधार नामांकन आईडी अब स्वीकार नहीं की जाएगी। इस वर्ष से आधार नामांकन आईडी का उपयोग करके पैन आवेदन और आईटीआर दाखिल नहीं किए जा सकेंगे। करदाताओं को अब वास्तविक आधार संख्या देनी होगी। सभी आईटीआर फॉर्म (आईटीआर 1, 2, 3 और 5) से आधार नामांकन आईडी फील्ड हटा दी गई है।
नए आईटीआर फॉर्म दाखिल करने की तैयारी विषय पर गोष्ठी
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टीडीएस विभाग का उल्लेख करना होगा
नई कर व्यवस्था से पुरानी कर व्यवस्था में जाने वाले व्यवसाय मालिकों को अब आईटीआर चार में विस्तृत जानकारी देनी होगी। इसमें फॉर्म 10-आईईए की पिछली फाइलिंग और इस बात की पुष्टि शामिल है कि क्या वे नई व्यवस्था से बाहर रहना चाहते हैं। पहले एक साधारण स्पष्टीकरण ही पर्याप्त होता था। उन्होंने बताया कि टीडीएस कटौती होने पर टीडीएस विभाग का उल्लेख करना होगा।
संपत्ति और देनदारियों का खुलासा करना होता था
यह आईटीआर 1, 2, 3 और 5 पर लागू होता है। विकलांगता कटौती के लिए प्रमाणपत्र की आवश्यकता होगी। परिसंपत्ति और देयता रिपोर्टिंग सीमा बढ़ाकर एक करोड़ कर दी गई। पहले 50 लाख से अधिक आय वाले करदाताओं को आईटीआर की अनुसूची एएल में अपनी संपत्ति और देनदारियों का खुलासा करना होता था। अब यह आवश्यकता केवल तभी लागू होगी।
कोई भी गलत डिडक्शन क्लेम नहीं करना चाहिए
जब सकल कुल आय एक करोड़ से अधिक होगी। यह उच्च आय वाले करदाताओं के लिए एक राहत की बात है। सीए दीप कुमार मिश्र ने कहा कि कोई भी गलत डिडक्शन क्लेम नहीं करना चाहिए। इस मौके पर प्रदीप कुमार द्विवेदी, शरद सिंघल, मनीष श्रीवास्तव, शरद शेखर, राजीव गुप्ता, ज्ञान गुप्ता ,श्रेया ओमर, राहुल चंद्र गुरमीत सिंह, डीएस चंदेल, संतोष गुप्ता, प्रदीप मल्होत्रा , विमल वाजपेई, अवधेश मिश्रा, रणजीत सिंह आदि थे।