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Kanpur: नए आईटीआर फॉर्म दाखिल करने पर गोष्ठी, आधार नामांकन आईडी अब मान्य नहीं, वक्ताओं ने दी ये अहम जानकारी

Wed, 16 Jul 2025 11:06 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: इनकम टैक्स बार एसोसिएशन द्वारा नए आईटीआर फॉर्मों पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें बताया गया कि अब आधार नामांकन आईडी स्वीकार नहीं होगी और एक करोड़ से अधिक आय पर ही संपत्ति-देनदारी रिपोर्टिंग करनी होगी।
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नए आईटीआर फॉर्म दाखिल करने की तैयारी विषय पर गोष्ठी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से मंगलवार को सिविल लाइंस स्थित सभागार में नए आईटीआर फॉर्म दाखिल करने की तैयारी विषय पर गोष्ठी हुई। वक्ताओं ने बताया कि अब आधार नामांकन आईडी स्वीकार नहीं की जाएगी। नई कर व्यवस्था से बाहर निकलने के लिए करदाता को ज्यादा जानकारी देनी होगी। नई कर व्यवस्था से क्यों निकल रहे हैं बताना पड़ेगा।

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मुख्य वक्ता सीए गोविंद महेश्वरी ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए आईटीआर दाखिल करने के लिए नौ प्रमुख परिवर्तन किए गए हैं। 1.25 लाख तक के पूंजीगत लाभ के लिए सरलीकृत आईटीआर एक और आईटीआर चार भरना होगा। पहले लाभ छूट सीमा एक लाख के भीतर होती थी, तब भी करदाताओं को आईटीआर दो या तीन जैसे जटिल फॉर्म भरने पड़ते थे।

हटा दी गई है आधार नामांकन आईडी फील्ड
इस बदलाव से छोटे निवेशकों के लिए रिटर्न प्रक्रिया आसान हो गई है। उन्होंने बताया कि कि आधार नामांकन आईडी अब स्वीकार नहीं की जाएगी। इस वर्ष से आधार नामांकन आईडी का उपयोग करके पैन आवेदन और आईटीआर दाखिल नहीं किए जा सकेंगे। करदाताओं को अब वास्तविक आधार संख्या देनी होगी। सभी आईटीआर फॉर्म (आईटीआर 1, 2, 3 और 5) से आधार नामांकन आईडी फील्ड हटा दी गई है।

नए आईटीआर फॉर्म दाखिल करने की तैयारी विषय पर गोष्ठी - फोटो : amar ujala
टीडीएस विभाग का उल्लेख करना होगा
नई कर व्यवस्था से पुरानी कर व्यवस्था में जाने वाले व्यवसाय मालिकों को अब आईटीआर चार में विस्तृत जानकारी देनी होगी। इसमें फॉर्म 10-आईईए की पिछली फाइलिंग और इस बात की पुष्टि शामिल है कि क्या वे नई व्यवस्था से बाहर रहना चाहते हैं। पहले एक साधारण स्पष्टीकरण ही पर्याप्त होता था। उन्होंने बताया कि टीडीएस कटौती होने पर टीडीएस विभाग का उल्लेख करना होगा।

संपत्ति और देनदारियों का खुलासा करना होता था
यह आईटीआर 1, 2, 3 और 5 पर लागू होता है। विकलांगता कटौती के लिए प्रमाणपत्र की आवश्यकता होगी। परिसंपत्ति और देयता रिपोर्टिंग सीमा बढ़ाकर एक करोड़ कर दी गई। पहले 50 लाख से अधिक आय वाले करदाताओं को आईटीआर की अनुसूची एएल में अपनी संपत्ति और देनदारियों का खुलासा करना होता था। अब यह आवश्यकता केवल तभी लागू होगी।
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कोई भी गलत डिडक्शन क्लेम नहीं करना चाहिए
जब सकल कुल आय एक करोड़ से अधिक होगी। यह उच्च आय वाले करदाताओं के लिए एक राहत की बात है। सीए दीप कुमार मिश्र ने कहा कि कोई भी गलत डिडक्शन क्लेम नहीं करना चाहिए। इस मौके पर प्रदीप कुमार द्विवेदी, शरद सिंघल, मनीष श्रीवास्तव, शरद शेखर, राजीव गुप्ता, ज्ञान गुप्ता ,श्रेया ओमर, राहुल चंद्र गुरमीत सिंह, डीएस चंदेल, संतोष गुप्ता, प्रदीप मल्होत्रा , विमल वाजपेई, अवधेश मिश्रा, रणजीत सिंह आदि थे।
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