एक पाप ने खोली कड़ियां, सामने आई ‘क्राइम कुंडली’
कुछ समय पहले जब नवाब सिंह यादव को एक किशोरी से दुष्कर्म के संगीन आरोप में दबोचा गया, तो खाकी ने उसकी पूरी सल्तनत को खंगालना शुरू किया। जब पुलिस ने नवाब और उसके भाई नीलू का बही-खाता खोला, तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए।
इतने मुकदमों ने किया हैरान
रसूखदार नवाब सिंह के नाम पर एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 32 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। वहीं, उसका भाई नीलू भी पीछे नहीं था, उसके खाते में 27 केस दर्ज मिले। इन दोनों का साया बनकर अपराध में मदद करने वाली पूजा तोमर के खिलाफ भी पांच मुकदमे दर्ज पाए गए।
तत्कालीन कोतवाल की चालाकी और आ गया फैसला
अपराध के इस बड़े मकड़जाल को देखते हुए तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक आलोक दुबे ने सूझबूझ दिखाई। उन्होंने इस तिकड़ी पर 'गैंगस्टर एक्ट' के तहत मुकदमा ठोंक दिया। पुलिस की मजबूत पैरवी, पुख्ता सबूतों और गवाहों की गवाही के आगे नवाब का रसूख ताश के पत्तों की तरह बिखर गया।
साफ संदेश दिया- कानून के हाथ लंबे होते
आज आलम यह है कि कभी वीआईपी जिंदगी जीने वाला नवाब बांदा जेल में, नीलू कौशांबी जेल में और पूजा तोमर कन्नौज जिला जेल की सलाखों के पीछे अपनी किस्मत को रो रहे हैं। कोर्ट के इस कड़े फैसले ने अपराधियों को साफ संदेश दे दिया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और पाप का घड़ा एक दिन जरूर भरता है।