दस जनवरी को जिला कन्नौज की कोतवाली छिबरामऊ के गांव घिलोई के पास सामान्य से स्लीपर में तब्दील हुई बस व ट्रक में भिड़ंत हो गई थी। इसमें कई लोग जलकर मर गए थे। प्रमुख सचिव परिवहन के आदेश पर 31 जनवरी को एआरटीओ शांतिभूषण पांडेय और हमीरपुर के एआरटीओ मोहम्मद हसीब को निलंबित कर दिया गया था।
शांतिभूषण निलंबन के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने उनके निलंबन पर रोक लगा दी है। वहीं मोहम्मद हसीब भी हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं। कन्नौज में हुए बस हादसे के बाद आरटीओ प्रवर्तन कानपुर सुधीर सिंह ने 19 फरवरी को एआरटीओ फर्रुखाबाद शांतिभूषण पांडेय व मोहम्मद हसीब के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। इसकी जांच भी चल रही है।
निलंबन के खिलाफ एआरटीओ शांतिभूषण पांडेय की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। इसमें एआरटीओ शांतिभूषण ने जानकारी दी कि विमल चतुर्वेदी की जो बसें सामान्य से स्लीपर में तब्दील हुईं थीं उनको उनके कार्यकाल में फिटनेस का प्रमाण पत्र नहीं दिया गया था।
जिस स्लीपर बस से हादसा हुआ था उसका फिटनेस प्रमाण पत्र मोहम्मद हसीब के कार्यकाल में जारी हुआ था। विमल की सामान्य से स्लीपर में तब्दील हुई 21 बसों की फाइलें कार्यालय से गायब कर दी गईं थीं। इस मामले में उन्होंने फतेहगढ़ कोतवाली में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने एआरटीओ शांतिभूषण पांडेय के निलंबन पर रोक लगा दी है। वहीं मोहम्मद हसीब ने बताया कि अब वह भी हाईकोर्ट जाएंगे।