साबरमती और कालिंदी एक्सप्रेस प्रकरण की जांच पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों के हाथ अभी खाली है। कालिंदी मामले में पुलिस ने पूछताछ के बाद करीब 14 लोगों को छोड़ दिया। शक के आधार पर आठ से ज्यादा नए लोगों को उठाया है। पुलिस एक और संदिग्ध को तलाश रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि साजिश करने वालों को फंडिंग ऐसे ही किसी व्यक्ति की है, जिसका आपराधिक रिकार्ड नहीं है।
आठ अगस्त की रात करीब साढ़े आठ बजे बर्राजपुर स्टेशन से आगे ट्रैक पर भरा हुआ एलपीजी सिलिंडर रखकर कालिंदी एक्सप्रेस को बेपटरी करने की नाकाम कोशिश की गई थी। वहां पर पेट्रोल बम और बारूद जैसा पाउडर मिला है। अफसरों का मानना था कि ट्रेन को बेपटरी करके जनहानि करने की साजिश थी। पुलिस, एटीएस और एनआइए, आईबी मामले की जांच कर रही हैं। शक के आधार पर क्षेत्र में रहने वाले एक हिस्ट्रीशीटर को घटनास्थल के आसपास मिली लोकेशन के आधार पर उठा कर पूछताछ की गई थी।
पुलिस के साथ ही एटीएस ने भी उससे पूछताछ की थी। इसके बाद उसे जांच चलने तक शहर के बाहर न जाने चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था। सूत्रों का कहना है कि हिस्ट्रीशीटर की गतिविधियों और उसके करीबियों की जांच हो रही है। साथ ही उसकी कॉल डिटेल की पड़ताल भी की जा रही है। हिस्ट्रीशीटर छह माह पहले पश्चिम बंगाल में करीब आठ महीने तक रहा। उस पर कानपुर के साथ ही आगरा, कन्नौज, फतेहपुर और इटावा में आपराधिक गतिविधियों के कई मामले दर्ज हैं।
उससे जुड़े कुछ और लोगों को पूछताछ के लिए उठाया गया है। हालांकि अधिकारी आधिकारिक तौर पर कुछ बोलने से बच रहे हैं। आला अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान किसी भी पर भी शक होने पर उससे पूछताछ की जा रही है। जब तक कुछ ठोस न मिल जाए, तब तक कुछ भी कहना मुमकिन नहीं है।