चाकू से हमलाकर घायल करने की 21 साल पुरानी घटना में सेशन से हाईकोर्ट और हाईकोर्ट से फिर सेशन कोर्ट तक कानूनी लड़ाई जारी रही। वर्ष 2003 में जो आरोपी दोषमुक्त करार दे दिए गए थे, हाईकोर्ट के आदेश पर हुई दोबारा सुनवाई में वही आरोपी दोषी साबित हुए।
फास्ट ट्रैक कोर्ट 52 के न्यायाधीश हरेंद्र कुमार ओझा ने हत्या के प्रयास में आरोपी दोनों भाइयों को सात-सात साल कैद और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया। जुर्माने से पांच हजार रुपये पीड़ित को क्षतिपूर्ति के रूप में देने के आदेश दिए।
चमनगंज के श्रीनगर निवासी शिवशंकर जायसवाल ने सात अक्तूबर 2000 को हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि मकान के पीछे रहने वाले भाइयों लाल और रमेश ने उनकी बहन से छेड़छाड़ की थी।
भाई हरिशंकर ने विरोध किया तो दोनों रंजिश मानने लगे। छह अक्तूबर की रात हरिशंकर घर के बाहर फुटपाथ पर सो रहा था तभी दोनों भाइयों ने चाकू से हमला कर दिया। हरिशंकर 10-12 दिन अस्पताल में भर्ती रहा और ऑपरेशन भी हुआ।