कानपुर। शहर के एक कार्यक्रम में जहां एसएसपी शलभ माथुर ने माना कि अस्पतालों और पुलिस की छवि आम लोगों में सही नहीं है। उनका कहना भी लगभग सही है। हैलट के मेडिसिन इमरजेंसी में रविवार दोपहर और शाम मरीजों और तीमारदारों को बेरहमी से जूनियर डॉक्टरों ने मारापीटा। पुलिस ने तीमारदारों को ही दोषी बनाया तो पीड़ित बिना तहरीर दिए चले गए।
चौबेपुर के तातियागंज की सोनी यादव (34) पत्नी अशोक को जच्चा-बच्च्ा अस्पताल से रविवार सुबह हैलट इमरजेंसी के मेडिसिन वार्ड रेफर किया गया। दोपहर बाद तकरीबन 1.30 बजे सोनी के रिश्ते का भतीजा अंशुमान यादव और सोनी का भाई राजेंद्र सिंह यादव ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट लेकर इमरजेंसी पहुंचे। अंशुमान ने जूनियर डॉ. हिमांशु की तरफ रिपोर्ट बढ़ाई तो उन्होंने डांट दिया। आरोप है कि अंशुमान ने विरोध किया तो डॉ. हिमांशु, डॉ. नागेंद्र समेत अन्य जूनियर डॉक्टरों ने उसे मारना शुरू कर दिया। बीच-बचाव करने पहुंचे राजेंद्र को भी मारापीटा गया। सोनी की बहन शिव देवी को भी पीटा। गर्भवती सोनी को भी डॉक्टरों ने थप्पड़ जड़े। कोई भागने न पाए इसलिए जूनियर डॉक्टरों ने गेट बंद कर गार्ड को बाहर भगा दिया। वहीं शाम को हैलट के वार्ड सात में भर्ती सैफई निवासी सुभाष (हार्ट पेशेंट) के तीमारदारों को जूनियर डॉक्टरों ने मारा पीटा। ससुर राम प्रकाश ने बताया कि दोपहर बाद से कोई भी डॉक्टर मरीज को देखने नहीं आया। जब उनसे देखने के लिए कहा गया तो कमरा बंद कर जूनियर डॉक्टरों ने हमला कर दिया।
पहले तीमारदार ने थप्पड़ मारा : डॉ. गिरी
हैलट इमरजेंसी पहुंची मेडिसिन की नोडल अधिकारी डॉ. रिचा गिरी को जूनियर डॉक्टरों ने बताया कि सोनी के साथ कई लोग आए और इलाज कर रहे जूनियर डॉ. नागेंद्र को तमाचा जड़ दिया। विरोध करने पर दरवाजे का शीशा तोड़ दिया। डॉ. गिरी ने कहा कि जूनियर डॉक्टर को तीमारदार ने थप्पड़ मारा था। मीडियाकर्मी को फोटो डिलीट कराने के मामले में कार्रवाई की जाएगी।
हड़ताल की करने लगे तैयारी
मेडिसिन के जूनियर डॉक्टरों ने अपनी गलती छिपाने के लिए हड़ताल की भी तैयारी कर ली। उन्होंने सर्जरी और आर्थो के जूनियर डॉक्टरों से मदद मांगी हालांकि उन दोनों विभागों के जूनियर डॉक्टरों ने कोई रिस्पांस नहीं दिया।
लिखा पढ़ी करते रहे डॉक्टर, मरीज की मौत
हैलट इमरजेंसी के सर्जरी, मेडिसिन और एनेस्थीसिया विभाग के बीच तीन दिनों से चक्कर काट रहे मरीज की रविवार सुबह मौत हो गई। गंभीर स्थिति होने के बाद भी मरीज को आईसीयू में नहीं रखा गया। कानपुर देहात के रसूलाबाद रामपुर निवासी रामजीवन (60) एक हफ्ते पहले सड़क हादसे में घायल हो गए थे। उन्हें हैलट इमरजेंसी में सर्जन डॉ. विकास कटियार की यूनिट में भर्ती कराया गया था। सर्जरी के डॉक्टरों ने रामजीवन को तत्काल आईसीयू में रखने के लिए एनेस्थीसिया विभाग को लिखा। इस बीच मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों ने जांच की तो सीरम क्रिटनिन ज्यादा बढ़े होने के कारण डायलिसिस की सलाह दे दी थी। शनिवार को मीडियाकर्मियों ने इस बाबत डॉक्टरों से सवाल किए तो रामजीवन की हालत गंभीर बताकर उसे केजीएमयू लखनऊ के लिए रेफर कर दिया। रविवार सुबह तकरीबन आठ बजे रामजीवन ने दम तोड़ दिया। सर्जरी के डॉ. विकास कटियार ने कहा कि मरीज की हालत ज्यादा क्रिटिकल हो गई थी। शुरू में आईसीयू के लिए लिखा गया था लेकिन बाद में दिक्कत बढ़ने पर केजीएमयू के लिए रेफर किया गया था। एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल वर्मा ने कहा कि मरीज को आईसीयू में भर्ती कराने के लिए सर्जरी विभाग को लिखा था। बाद में सर्जरी के डॉक्टर से बात भी हुई। मरीज के घर वाले उसे न तो केजीएमयू ले गए और न ही आईसीयू में ही ले आए।