अभियोजन अधिकारी शैलेश अगिभनहोत्री व अम्बरीष टंडन ने तर्क रखा कि विवेचना के लिए विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया है। इरफान जहां-जहां रुके व यात्रा की वहां से सबूत इकट्ठे करने हैं। दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के सीसीटीवी फुटेज से इरफान की पहचान हो गई है।
एयरपोर्ट अथॉरिटी से सबूत इकट्ठे करने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसमें समय लगता है जबकि विवेचक को रिमांड के लिए कोर्ट में आना पड़ रहा है जिससे वह विवेचना के लिए बाहर नहीं जा पा रहे। एक गवाह ने इरफान का फर्जी आधार कार्ड तैयार होते देखा भी है।
कानूनन भी पुलिस को विवेचना के लिए पहले 15 दिन का समय मिलना चाहिए। इस समयावधि के बाद ही विवेचना की प्रगति के आधार पर रिमांड पर बहस होनी चाहिए। वहीं इरफान और अशरफ की ओर से अधिवक्ता नरेश चंद्र त्रिपाठी ने तर्क रखा कि पुलिस कई दिनों से जांच-पड़ताल कर रही है, लेकिन अब तक उसके पास कोई ठोस सबूत नहीं हैं।
पुलिस जबरन दोनों को न्यायिक हिरासत में रखना चाहती है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि इरफान के हवाई यात्रा करने, होटल में रुकने की बात कही गई है। दूसरे प्रदेशों में जाकर पुलिस को सबूत इकट्ठे करने हैं जिसके लिए समय लगेगा इसलिए कोर्ट ने दोनों को 20 दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दे दिया।