जन्माष्टमी को लेकर यहां स्थित मां अलोपा देवी मंदिर में तैयारियां शुरू हो गई हैं मंदिर परिसर की साफ-सफाई के साथ आकर्षक सजावट का काम चल रहा है। पर्व पर विशेष पूजा-अर्चना, भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार और जन्मोत्सव की तैयारियां की जा रही हैं।
रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को भेजा था संदेश
पौराणिक मान्यता के अनुसार कुदरकोट का प्राचीन नाम कुंदनपुर था। यहां के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में चाहती थीं। राजा भीष्मक भी इसके पक्ष में थे, लेकिन उनके पुत्र रुक्मी की मित्रता शिशुपाल से थी। रुक्मी अपनी बहन का विवाह शिशुपाल से कराना चाहता था।
मां अलोपा देवी मंदिर में चल रही तैयारियां
कुदरकोट स्थित मां अलोपा देवी मंदिर इस पौराणिक परंपरा की प्रमुख पहचान माना जाता है। मान्यता है कि रुक्मिणी यहां माता गौरी की पूजा करने आती थीं। जन्माष्टमी को लेकर मंदिर में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है और जन्मोत्सव के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
पीढ़ियों से चली आ रही पौराणिक मान्यता
भागवत पुराण में वर्णित रुक्मिणी-हरण की कथा को कुदरकोट से जोड़कर स्थानीय स्तर पर यह धार्मिक मान्यता पीढ़ियों से चली आ रही है। हालांकि श्रीकृष्ण की ससुराल को लेकर अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग दावे और मत मिलते हैं। इसके बावजूद कुदरकोट की पौराणिक मान्यता और मां अलोपा देवी मंदिर जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन जाता है।