कन्नौज में किले के पास राजा जयचंद स्मृति समारोह का आयोजन हुआ। इतिहासकारों ने उन्हें पराक्रमी राजा बताया। इस मौके पर राजा जयचंद को गद्दार साबित करने वाले को पांच लाख का इनाम देने की फिर से घोषणा की गई। कान्यकुब्ज शिक्षा एवं समाज सेवा समिति के तत्वावधान में महाशिवरात्रि पर्व पर राजा जयचंद स्मृति समारोह का आयोजन होता है। इस बार भी आयोजन हुआ।
समिति के अध्यक्ष नवाब सिंह यादव ने कहा कि कन्नौज की धरती हमेशा से वीरता के लिए जानी गई है। इतिहासकारों ने अपने राजा की चापलूसी में कन्नौज के राजा जयचंद के चरित्र को गलत तरीके से पेश किया। समिति ने दावा किया कि अगर राजा जयचंद को कोई गद्दार साबित कर दे तो समिति की तरफ से पांच लाख का नगद इनाम दिया जाएगा।
इस मौके पर कई जिलों से आए कलाकारों ने आल्हा के माध्यम से कन्नौज के यशस्वी राजा जयचंद की वीरता का गुणगान किया। आल्हा सम्राट संग्राम सिंह ने आल्हा का गायन कर श्रोताओं में जोश भरा। पीएसएम डिग्री कालेज के पूर्व प्रवक्ता लाल चंद्र शर्मा ने राजा जयचंद को उत्तर भारत का पराक्रमी योद्धा बताया। कहा कि काव्य मीमांसा व भविष्य पुराण जो तत्कालीन पुस्तकें हैं, इनमें जयचंद को उत्तर भारत का अपने समय का सबसे प्रतापी व प्रजापालक नरेश कहा गया।
इन पुस्तकों के अनुसार जयचंद का साम्राज्य 700 योजन तक फैला था। यह कन्नौज के वैभव को प्रदर्शित करता है। इससे पहले गौरीशंकर रोड पर स्थापित राजा जयचंद की मूर्ति पर माल्यार्पण किया गया। इस मौके पर उड़ीसा के पूर्व डीजीपी अरुण कुमार उपाध्याय ने राजा जयचंद की वीरता का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि राजा जयचंद के समय कन्नौज का वैभव पूरी दुनिया में फैला था। ऐसा राजा कभी गद्दार नहीं हो सकता, जिसने अपने प्राण अपनी धरती के लिए रणभूमि में त्यागे हों।