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इस्लामिक इल्मी अकादमी की बैठक: तब्लीगी जमात का शिर्क और आतंकवाद से कोई संबंध नहीं

Mon, 13 Dec 2021 02:23 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

सऊदी हुकूमत की तरफ से तब्लीगी जमात पर कई आरोप लगाकर पाबंदी लगाए जाने का मसला चर्चा में आया, जिसके बाद सदस्यों की संयुक्त राय से कहा गया कि भले ही तब्लीगी जमात में बहुत सी कमियां पाई जाती हैं पर हमारा दहशतगर्दी (आतंकवाद) से कोई संबंध नहीं है।
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आतंकवाद - फोटो : Defence Aviation Post
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विस्तार
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कानपुर में मौजूदा समय में मुसलमानों के पेचीदा मसलों को हल करने के लिए शहर के उलमा व मुफ्तियों के पैनल कुल हिंद इस्लामिक इल्मी अकादमी की मासिक बैठक रविवार को जाजमऊ के अशरफाबाद की जामा मस्जिद में हुई। इसकी अध्यक्षता मौलाना मुफ्ती इकबाल अहमद कासमी ने की। पहला मसला बिटक्वाइन क्रिप्टो करेंसी की हकीकत और उसकी शरई हैसियत पर पूछा गया।
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इसके जवाब में उलमा ने कहा कि विशेषज्ञों से बातचीत से यह बात स्पष्ट हुई कि बिटक्वाइन को कई देशों में कानूनी दर्जा मिल गया है, इस आधार पर लेन-देन का माध्यम मान लिया गया है। शरीअत के अनुसार इसको बिल्कुल हराम नहीं करार दिया जा सकता है। जिन देशों में इसको कानूनी दर्जा हासिल नहीं है, वहां एहतियात इसी में है कि फिलहाल इस तरह की मुद्राओं से परहेज किया जाए। 

बैठक में सऊदी हुकूमत की तरफ से तब्लीगी जमात पर कई आरोप लगाकर पाबंदी लगाए जाने का मसला चर्चा में आया, जिसके बाद सदस्यों की संयुक्त राय से कहा गया कि भले ही तब्लीगी जमात में बहुत सी कमियां पाई जाती हैं, इसके बावजूद तब्लीगी जमात का शिर्क और दहशतगर्दी (आतंकवाद) से किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं है।
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इसलिए ‘इस्लामिक इल्मी अकादमी’ सऊदी हुकूमत की तरफ से जमात पर शिर्क और दहशतगर्दी (आतंकवाद) जैसे लगाए गए आरोपों को नकारती है और मांग करती है कि सऊदी हुकूमत बिना जांच के इस तरह के आरोप लगाने से परहेज करे। इस दौरान यह भी कहा गया कि गुटखा, तंबाकू आदि खिलाने वालों को धन्यवाद न दें, बल्कि उसे खाने से इनकार करते हुए दूसरे को भी हिदायत देनी चाहिए कि यह खाना गलत है और इससे नुकसान है।

इस्लाम में इसे मकरूह यानी मना किया गया है। मुफ्ती मोहम्मद वासिफ कासमी ने कुरान पाक की तिलावत से बैठक की शुरुआत की। इसमें इल्मी अकादमी के अध्यक्ष मुफ्ती इकबाल अहमद कासमी, उपाध्यक्ष मुफ्ती अब्दुर्रशीद कासमी, महासचिव मौलाना खलील अहमद मजाहिरी के साथ जमीअत उलमा के प्रदेश उपाध्यक्ष मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह कासमी, मुफ्ती सैयद मोहम्मद उस्मान कासमी, मौलाना मोहम्मद अनीस खां कासमी, मौलाना मोहम्मद इनामुल्लाह कासमी मौजूद रहे।
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