सिंचाई विभाग की जमीनों पर अवैध कब्जे खाली कराने का अभियान रूक गया है। इस बार पुलिस फोर्स न मिलने की वजह से अभियान शुरू भी नहीं हो सका। अब डीएम के अवकाश से आने के बाद अभियान की रणनीति फिर बनाई जाएगी।
कानपुर में सिंचाई विभाग का अभियान दो साल में पांचवीं बार राजनीतिक दबाव की भेंट चढ़ गया। अभियान शुरू भी नहीं हो पाया कि इसे रोक दिया गया है। अब डीएम के अवकाश के आने के बाद फिर से अभियान की रणनीति बनाई जाएगी। उसके बाद ही अभियान चल पाएगा। इसके पीछे राजनीतिक दबाव की भी कहानी है।
विज्ञापन
जैसे ही सिंचाई विभाग अभियान की शुरूआत करता है। विभिन्न दलों के नेता राजनीति शुरू कर देते हैं। सिंचाई विभाग की करोड़ों रुपये कीमत की बहुमूल्य जमीन पर नेताओं और उनके समर्थकों के अवैध कब्जे बताए जाते हैं। सिंचाई विभाग की भूमि पर पक्के निर्माण बना लिए गए हैं। इनमें अधिकारियों के भी आवास हैं। इसके अलावा व्यापारिक प्रतिष्ठान बना लिए गए हैं।
सिंचाई विभाग की भूमि पर 17 स्थानों पर चार हजार से अवैध कब्जे हैं। 17 मई से इन अवैध कब्जों को हटाया जाना था लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारी पांच घंटे तक पनकी थाने में बैठे रहे और पुलिस नहीं मिल पाई। सिंचाई विभाग ने पहले ही डीएम को इस संबंध में फाइल भेज दी थी जिसकी सूचना पुलिस को भी दी गई थी।
19 मई को गोविंदनगर थाना क्षेत्र में अभियान चलाया जाना था] लेकिन पुलिस फोर्स न मिलने का मामला आड़े आ गया। सिंचाई विभाग ने अभियान ही रोक दिया है। सहायक अभियंता अजय राय ने बताया कि पुलिस मिल जाए तो अभियान शुरू करें।