नोएडा से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे, वहां से इंडिगो की फ्लाइट से मुंबई पहुंचे। मुंबई में विधायक के साले पहले से ही गाड़ी लेकर उनका इंतजार कर रहे थे। मुंबई में कुछ असरदार लोगों के यहां रुकने के बाद वह हैदराबाद पहुंचे। वहां कुछ दिन रुकने के बाद उन्होंने ठिकाना बदलने के लिए ट्रक का ही सहारा लिया और ट्रक में बैठकर नागपुर पहुंचे।
नागपुर से उज्जैन होते हुए विधायक राजस्थान में अपने पुरखों के शहर नागौर पहुंचे। यहां से अलवर भी गए। दोनों ही जगह पुलिस ने छापेमारी की, लेकिन वह हाथ नहीं लगे थे। वहीं इरफान के वकील नरेश चंद्र त्रिपाठी ने दावा किया विधायक पुलिस से डर गए थे। वह कहीं भागे नहीं थे, बल्कि अपने ही घर में छिपे हुए थे।
सपा विधायक ने लगवाए नारे
सरेंडर के दौरान वहां मौजूद एक सपा विधायक ने भीड़ से कहा कि.. अरे इरफान जिंदाबाद के नारे तो लगा दो यार। वीडियो में विधायक की आवाज रिकॉर्ड हो गई।
इरफान सोलंकी से अफसरों ने पूछ डाले 80 सवाल
अफसर- 8 नवंबर की रात जब पुलिस ने दबिश दी तब आप दोनों कहां चले गए थे?
विधायक- हम दोनों भाई लखनऊ गए थे। फिर वहां से दिल्ली फिर महाराष्ट्र गए थे।
अफसर- आपने फर्जी आधार कार्ड बनाकर हवाई यात्रा की?
विधायक- यह आरोप निराधार है। मैंने ऐसा कोई अपराध नहीं किया।
अफसर- (फोटो दिखाते हुए) अशरफ नाम से बुकिंग, आपका सीट नंबर और यह आपकी एयरपोर्ट से निकलती फोटो पुलिस के पास सबूत है?
विधायक- (रोते हुए ) अब आप ही मुझे बचा सकते हो, मेरी मदद करो।
अफसर- आपने महिला के घर पर आग क्यों लगाई?
विधायक- मैंने किसी के घर में आग नहीं लगाई। वह जमीन मेरे भाई के नाम पर है। महिला से कई बार इस बारे में बात करने का प्रयास किया गया था।
अफसर- अगर आपने आग नहीं लगाई तो फिर आप भागे क्यों?
विधायक- मैं डर गया था, मुझे लगा मेरा करियर खत्म हो जाएगा, इस कारण मैं भाग गया था।
अफसर - (फोटो दिखाते हुए )हैदराबाद में कितने दिन तक रहे। कौन कौन आपका सहयोग किया। बगैर आईडी क्यों रूके हुए थे?
विधायक- 13 से 17 नवंबर तक हैदराबाद के होटल में रुका था। वहां के एक लोकल चैनल के पत्रकार और राजनेता का सहयोग लिया था। जिनकी पत्नी डॉक्टर हैं।
अफसर- किन-किन लोगों ने फरारी में आपका सहयोग किया था?
विधायक - अपने साले अख्तर के जरिये कुछ लोगों की अन्य राज्यों में मदद ली थी। उन्होंने ठहरने और खाने पीने का इंतजाम किया था।
ऐसे सैकड़ों सवाल पुलिस ने विधायक इरफान सोलंकी से पूछे। इस दौरान पुलिस ने उनके बयानों की वीडियोग्राफी भी कराई, जिससे कि वह बाद में मुकर न जाएं। इसके साथ ही फोरेंसिक टीम विधायक के फिंगर प्रिंट और हाथों के निशान भी लिए।