मामले की छानबीन में प्राचार्य डॉ. काला के साथ परचेज सेक्रेटरी डॉ. प्रशांत त्रिपाठी और फाइनेंस कंट्रोलर अजय प्रताप सिंह ने पाया कि दिल्ली की फर्म न्यूसेल वेलनैस ने जर्मनी की कंपनी रिचर्ड वुल्फ का जो अथॉरिटी सर्टिफिकेट लगाया था वह फर्जी है।
जर्मन कंपनी ने इसे फर्जी बताया। इसके बाद काॅलेज की ओर से महानिदेशक को पत्र भेजकर फर्जीवाड़े से अवगत कराया गया। इसमें यह भी बताया गया कि न्यूसेल वेलनैस कंपनी ने सैफई मेडिकल काॅलेज, डॉ. राममनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी को भी उपकरण सप्लाई किए हैं।
फर्म ने अभी तक जो सप्लाई की है उसकी जांच की जाए। इसके साथ ही फर्म ने जीएसवीएम के नेत्र रोग विभाग को एस्कैन सप्लाई किया था। यह 18 लाख रुपए का है। इसका भुगतान रोक दिया गया है। कऍलेज के प्राचार्य डॉ. काला ने बताया कि रिचर्ड वुल्फ कंपनी से संपर्क करने के बाद मामला खुला।