तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि अभी उसके तीन साथी फरार हैं। अमेरिका में भी गिरोह से जुड़े दो विदेशी हैं। जिनकी मदद से करोड़ों की ठगी को अंजाम दिया जा रहा था। सरगना कई सौ करोड़ का मालिक है।
अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का सरगना जसराज सिंह मंगलवार को क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गया। पिछले एक सप्ताह से उसकी तलाश जारी थी। क्राइम ब्रांच की टीम कॉल सेंटर संचालक व अन्य साथियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
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सरगना फैशन डिजाइनर है। निफ्ट से स्नातक की पढ़ाई की है। तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि अभी उसके तीन साथी फरार हैं। अमेरिका में भी गिरोह से जुड़े दो विदेशी हैं। जिनकी मदद से करोड़ों की ठगी को अंजाम दिया जा रहा था।
सरगना कई सौ करोड़ का मालिक है। 14 जुलाई को क्राइम ब्रांच ने गिरोह के चार आरोपियों मुनेंद्र शर्मा, संजीव कुमार, सूरज सुमन और जिकुरल्ला को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने मंगलवार को प्रेसवार्ता में बताया कि अब जनकपुरी दिल्ली (मूलरूप से बेगूसराय, बिहार) निवासी गिरोह के सरगना जसराज सिंह को गीता नगर से बीएमडब्ल्यू कार के साथ दबोच लिया।
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पूछताछ में पता चला कि जसराज ने ही पूरे नेटवर्क को खड़ा किया था। वायरस किसके कंप्यूटर में भिजवाना है और पैसे अमेरिका में किसको ट्रांसफर कराने और वो रकम उसके खातों में कैसे आएगी।
इन सभी चीजों का प्रबंध जसराज ही करता था। जसराज ने निफ्ट से फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई की है। पिछले कई वर्षों से फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर विदेशी नागरिकों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था।
विदेशी बैंक के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करता है जसराज
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि जसराज के पास से कई विदेशी बैंकों के क्रेडिट और डेबिट कार्ड बरामद हुए हैं। इनका इस्तेमाल पैसे मंगाने में करता था। अमेरिका में बैठा उसका साथी उसके क्रेडिट कार्ड का बिल वहीं जमा करता था।
सीपी के मुताबिक भारत में जसराज व उसकी कंपनी के अब तक 22 बैंक खातों की जानकारी मिली है। जिनको फ्रीज करवा दिया गया है। एक टीम उसके बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही है। पता कर रही है कि किन किन देशों से पैसे उसमें जमा किए गए और किसको ट्रांसफर हुए।
अमेरिका में गिरोह की जडे़ मजबूत
सीपी के मुताबिक अमेरिका में टूड एल थॉमस नाम का शख्स जसराज के गिरोह का सदस्य है। उसका मुख्य काम वहां के लोगों का डाटा उपलब्ध कराना और रकम का सेटलमेंट करना है। इसके लिए वो हर ठगी में 30 फीसदी हिस्सा लेता है।
दरअसल, डॉलर की रकम अमेरिकी पेमेंट गेटवे से वहीं किसी न किसी खाते में जाती है। बाद में थॉमस रकम जसराज को ट्रांसफर करता है। कुछ रकम सीधे जसराज के खातों में भी आती थी। रकम एक्सचेंज कैसे की जाती थी, इस बिंदु पर तफ्तीश जारी है।
ऐसे बनाया अंतरराष्ट्रीय गिरोह
जसराज ने बताया कि वह जेआरएस हॉट कोचर नाम की कंपनी के जरिये कपड़ों का विदेश में व्यापार करता है। उसकी मुलाकात नोएडा निवासी मुनेंद्र सिंह से हुई। जिसके जरिये वो आकाश मणि त्रिपाठी नाम के शख्स से मिला।
मुनेंद्र पहले से ही सॉफ्टवेयर के जरिये सिस्टम हैक कर डाटा चोरी करने का काम करता था। उधर, अमेरिकी नागरिक थॉमस पहले से ही जसराज के संपर्क में था। यही से इन सभी ने मिलकर अमेरिकी नागरिकों से ठगी की साजिश रची।
कानपुर में कॉल सेंटर का मुखिया मुनेंद्र बनाया गया। रकम नितिन शर्मा, आकाश मणि और आकाश गुप्ता के खातों में भी ट्रांसफर की जाती थी। इन तीनों की तलाश शुरू कर दी गई है।