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यूक्रेन में हालात बेहद खराब: छात्रों ने सुनाई आपबीती, 30 किमी पैदल पहुंचे रोमानिया, आसमान के नीचे काटी रात

Sun, 27 Feb 2022 10:30 PM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज

सार

रूस के हमले के चौथे दिन यूक्रेन में हालात बेहद खराब हो चुके हैं। यूक्रेन टर्नोपिल मेडिकल यूनिवर्सिटी में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे इत्र नगरी के बच्चे लाखों रुपए खर्च करके बसों से रोमानियां बॉर्डर पहुंच रहे हैं। यहां पर भारतीय दूतावास में पहले से ही हजारों की संख्या में छात्र मौजूद हैं। 
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रोमानिया के भारतीय दूतावास पर मौजूद करिश्मा और कामना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रूस के हमले से यूक्रेन में हालात बेहद खराब है...। ट्रर्नोपिल से 1.50 लाख रुपये खर्च कर बस की...। 70 किमी तक बस वाला ले गया, इसके बाद 30 किमी की दूरी पैदल तय कर रोमानिया पहुंचे हैं...। भीड़ इतनी है कि रात भी आसमान के नीचे बितानी पड़ी है...। खाने के लिए भी मारामारी मची हुई है...। ये दर्द बयान किया यूक्रेन में फंसे यहां के मेडिकल छात्र-छात्राओं ने। लाडलों की तकलीफ सुनकर परिजनों ने सरकार से जल्द उन्हें स्वदेश लाने की गुहार लगाई है। 

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रूस के हमले के चौथे दिन यूक्रेन में हालात बेहद खराब हो चुके हैं। यूक्रेन टर्नोपिल मेडिकल यूनिवर्सिटी में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे इत्र नगरी के बच्चे लाखों रुपए खर्च करके बसों से रोमानियां बॉर्डर पहुंच रहे हैं। यहां पर भारतीय दूतावास में पहले से ही हजारों की संख्या में छात्र मौजूद हैं। इस वजह से रात में हजारों की संख्या में छात्र खुले आसमान के नीचे बिता रहे हैं। बच्चे लगातार अपने परिजनों को फोन के जरिए अपनी व्यथा बता रहे हैं। इससे पैरेंट्स भी परेशान है। सभी भारत सरकार से अपने बच्चों को घर वापस लाने की गुहार लगा रहे हैँ।   

छिबरामऊ क्षेत्र के बरूआ सबलपुर गांव के रहने वाले बृजपाल शाक्य की दो बेटियां करिश्मा और कामना यूक्रेन टर्नोपिल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहीं हैं। शनिवार की रात दोनों बेटियों ने फोन करके पापा को बताया कि टर्नोपिल शहर में लगातार बमबारी हो रही है। यहां के हालात बदतर होते जा रहे हैं। इस वजह से उनके कैंपस के 30 छात्रों ने एक बस को 1.50 लाख रुपये में किराये पर लिया था, ताकि सौ किमी दूर दूसरे देश रोमानिया में पहुंच सकें। बस वाले ने भी 30 किलोमीटर पहले ही उतार दिया। इस वजह से पैदल रात को करीब 10 बजे रोमानिया भारतीय दूतावास पर पहुंचीं हैं। 
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बृजपाल का कहना है कि बेटियों ने बताया कि रोमानिया दूतावास पर पहले से 900 छात्र मौजूद थे। ऐसे में देखते ही देखते 1000 हजार छात्र और आ गए। अब हालात ये हो चुके हैं कि छात्रों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ रही है। इसके साथ ही बृजपाल का कहना है कि बच्चों ने बातचीत में बताया कि अब खाने और पीने के लिए भी दिक्कत आने लगी है।  

परिजनों से हो रही बातचीत 
करनपुर के रहने वाले संतोष पाल की बेटी अल्का पाल यूक्रेन के टर्नोपिल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहीं हैं। तीन साल से अल्पा यूक्रेन में रह रहीं हैं। हालांकि अल्का की परिजनों से बात हो रही है, मगर वहां बमबारी होने सभी परेशान हैं। अल्पा पिछले सितंबर माह घर से यूक्रेन गईं हैं। संतोष पाल ने केंद्र सरकार से बेटी वापस लाने की बात कही है।

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