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Kanpur News: बीमारियों को जन्म दे रहा बढ़ा ताप सूचकांक और नमी

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कानपुर। बंगाल की खाड़ी से आ रहीं नम हवाओं की वजह से बने बादलों ने तापमान घटा दिया लेकिन ताप सूचकांक बढ़ गया। इससे जितना तापमान रहा, उससे अधिक गर्मी शहरियों ने महसूस की। साथ ही सुबह और दोपहर को नमी का प्रतिशत भी बढ़ गया। इस कारण बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। वहीं, हल्के और मध्यम बादल छाने से अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान सामान्य औसत के नीचे आ गए।
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वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि मंगलवार को ताप सूचकांक 47 हो गया। ताप सूचकांक को 40 के नीचे रहना चाहिए। इससे अधिक सूचकांक सेहत के लिए ठीक नहीं रहता। मंगलवार को अधिकतम तापमान सामान्य औसत से 3.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 0.3 डिग्री कम रहा। सुबह नमी 68 प्रतिशत हो गई। दोपहर में नमी का प्रतिशत 36 हो गया। इससे उमस बढ़ गई। नमी और ताप सूचकांक बढ़ने से बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. विशाल कुमार गुप्ता ने बताया कि ताप सूचकांक बढ़ने से शरीर से पसीना निकलता है लेकिन सूखता नहीं है। इससे शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं हो पाता। शुरुआत में गर्मी लगने (हीट एग्जॉर्शन) की स्थिति होती है। व्यक्ति का मुंह सूखता है, चक्कर आता है। यह स्थिति अधिक देर तक बने रहने और इलाज न होने पर लू लगने की हालत हो सकती है। इससे हृदय, मस्तिष्क, गुर्दे आदि प्रभावित होते हैं। रोगी कोमा की स्थिति में पहुंच सकता है।
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सीएसए के मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले पांच दिनों में हल्के और मध्यम बादल रहेंगे। नम हवाओं आने की वजह से दो से चार मई के बीच मध्य और तेज हवाएं चलने, गरज-चमक के साथ बादल आने, धूल भरी आंधी और स्थानीय स्तर पर बूंदाबांदी का अनुमान है। वरिष्ठ मौसम विज्ञानी पांडेय ने बताया कि इस समय प्रदेश में बंगाल की खाड़ी की हवाएं नमी लेकर आ रही हैं। अरब सागर की हवाएं मध्य प्रदेश की तरफ अधिक जा रही हैं, लेकिन यहां चक्रवाती हवाओं का घेरा बना है। इस वजह से अरब सागर की हवाओं की नमी भी प्रदेश में आ रही है। उन्होंने बताया कि एक मई तक नया पश्चिमी विक्षोभ आने का अनुमान है। इस तरह तीन तरफ से नम हवाएं आएंगीं। तीनों हवाओं के टकराने से मौसमी गतिविधि में और बदलाव हो सकता है।

ताप सूचकांक (हीट इंडेक्स) ऐसा माप है जो तापमान और सापेक्ष आर्द्रता को मिलाकर मानव शरीर द्वारा महसूस किए जाने वाले तापमान को दर्शाता है। यह बताता है कि गर्मी कितनी महसूस हो रही है, चाहे हवा का तापमान वास्तव में कितना भी हो। यह हवा के तापमान और सापेक्ष आर्द्रता को जोड़कर शरीर के लिए महसूस होने वाले तापमान की गणना करता है। यह मौसम पूर्वानुमान में और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देशों को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कानपुर। उमस भरी गर्मी में वायरल कंजक्टिवाइटिस के रोगी बढ़ रहे हैं। इस समय हैलट की नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में औसत पांच से आठ रोगी प्रतिदिन आ रहे हैं। रोगी आंख में लाली, पानी आना और तेज दर्द की शिकायत लेकर आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कंजक्टिवाइटिस के रोगियों में हर आयु वर्ग के हैं। वायरल संक्रमण जल्दी ठीक नहीं हो रहा है। रोगियों को पांच से सात दिन तक दवाएं लेनी पड़ रही हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने बताया कि वैसे इक्का-दुक्का रोगी वायरल कंजक्टिवाइटिस के आते रहते हैं। लेकिन अब रोगियों की संख्या बढ़ रही है। बालरोगियों के परिजनों को सलाह दी जा रही है कि वायरल कंजक्टिवाइटिस वाले बच्चों को स्कूल न भेजें। इसके अलावा अगर घर में कोई रोगी है तो वह अपनी तौलिया या रुमाल किसी से शेयर न करें। आंखों की सफाई रखें और दवाएं नियमित लेते रहे हैं।
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