कानपुर में महाराजपुर के राजेश कुमार को ब्रेन अटैक पड़ने के तीसरे दिन हैलट लाया गया। जब उनका सीटी स्कैन कराया गया तो ब्रेन जगह-जगह से डैमेज होने के साथ ही पूरे सिर के अंदर खून के थक्के जम गए थे।
इन्हें न दवाओं से गलाया जा सकता था और न ही उनकी सर्जरी से कोई लाभ था। कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई। इसी तरह दिसबंर के आखिरी और जनवरी के पहले सप्ताह में जो रोगी आए हैं, उनमें करीब 50 फीसदी की मौत हो जा रही है। हैलट के इमरजेंसी प्रभारी न्यूरो फिजिशियन डॉ. प्रेम सिंह का कहना है कि ऐसा पहली बार हो रहा है।