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इनकमटैक्स छापाः भाजपा नेता, आरटीओ, वाणिज्यकर अफसर के ठिकानों से पकड़ा ‘नोटों का जखीरा’

Sat, 22 Apr 2017 01:22 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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भाजपा नेता चंद्रकुमार और वाणिज्यकर अधिकारी की पुरानी तस्वीर
इनकम टैक्स विभाग की लगातार छापेमारी से खलबली मच गई है। कानपुर के काकादेव निवासी भाजपा नेता चंद्रकुमार गंगवानी की शताब्दी ट्रैवल्स फर्म के आठ ठिकानों पर जांच चल रही है। जांच का मुआयना करने आयकर निदेशालय के ज्वाइंट डायरेक्टर अमरेश कुमार तिवारी खुद यहां पहुंचे। इनके आवास से अब तक कुल 15 लाख रुपये कैश मिल चुका है। पहले दिन 10 लाख रुपये व दूसरे दिन पांच लाख रुपये की करेंसी और पता चली। गंगवानी के आवास और फर्म के सात ठिकानों पर मिले दस्तावेजों को सील कर दिया गया है।   
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डेमो पिक
खंगाला जाएगा छह साल का रिकार्ड 
आयकर अफसरों ने पाया कि इनके कारोबार का कोई भी रिकार्ड मेनटेन नहीं था। किसी चीज का हिसाब नहीं मिला। मनमाफिक रिटर्न जमा किया जाता था। वाणिज्यकर में दिए गए टैक्स का भी कोई हिसाब नहीं। आय व्यय का रिकार्ड मेनटेन न होने की वजह से अफसरों ने बीते छह साल के दस्तावेजों की जांच का मन बनाया है। आयकर के सूत्र बताते हैं कि यह बड़ा मामला है। 20 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी सामने आएगी। बता दें कि इनकी शताब्दी ट्रैवल्स के फजलगंज में चार, काकादेव में तीन ऑफिसों व आवास पर एक साथ छापा मारा था।   
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डेमो पिक
एडिशनल कमिश्नर की महीने की कमाई 25 लाख 
वाणिज्यकर के जोनल कार्यालय कानपुर में हर माह दो करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली होती है। इस कमाई का हिस्सा अधिकारियों से लेकर वाणिज्यकर मुख्यालय, शासन के अफसरों और मंत्रियों तक में बंटता था। खुद एडिशनल कमिश्नर केशव लाल की महीने की कमाई 25 लाख रुपये से अधिक है। हालांकि काली कमाई के ये सिर्फ मोहरा भर हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि इससे बड़े कुबेर विभाग में डेरा डाले हैं। 

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डेमो पिक
यूं ही हंगामा नहीं करते थे व्यापारी 
कानपुर शहर के व्यापारियों और वाणिज्यकर अफसरों के बीच झड़प और वाव विवाद आम बात है। बीते एक साल में कई ऐसे मौके आए जब व्यापारी और वाणिज्यकर के अफसर वसूली पर आमने सामने हुए। कई बार कमिश्नर मो. इफ्तेखारुद्दीन के सामने भी मामला उठा, लेकिन हल नहीं निकला। 
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डेमो पिक
बिना नेम प्लेट व वर्दी के सिपाही करते वसूली 
वाणिज्यकर की सचल दल इकाइयों में बिना नेम प्लेट व वर्दी के सिपाहियों का साथ रहना आम बात है। यही सिपाही व्यापारियों के वाहनों से अवैध वसूली करते हैं। अमर उजाला में एक साल के दौरान कई बार ऐसी खबरें छपीं। अफसरों ने इन्हें संज्ञान लेने के नाम पर ढकोसला किया। आयकर की जांच में हकीकत सामने आई कि आखिर बिना वर्दी के सिपाहियों पर विभाग लगाम क्यों नहीं कस पाया था। 
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आरटीओ सुनीता वर्मा
आरटीओ के आवास से मिला 87 लाख कैश 
आयकर अफसरों को आरटीओ सुनीता वर्मा व वाणिज्यकर के ज्वाइंट कमिश्नर डीके वर्मा के आवास से अब तक 87 लाख रुपये का कैश मिल चुका है। मंगलवार को यह रकम 70 लाख थी। इसके अलावा दो और बैंक लॉकरों का पता चला है। सुनीता वर्मा के तीनों लॉकर इलाहाबाद स्थित बैंकों में हैं। वाणिज्यकर के एडिशनल कमिश्नर केशव लाल के यहां जांच में टीम के लगे होने की वजह से बुधवार को इनके लॉकरों और लखनऊ स्थित आवास की जांच नहीं हो सकी। इन्हें फिलहाल सील कर दिया गया है।
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डेमो पिक
लॉकरों की जांच दो- चार दिन में
माना जा रहा है कि इन लॉकरों की जांच दो- चार दिन में हो सकेगी। अंदेशा है कि लॉकरों में भारी भरकम ज्वैलरी मिल सकती है। आयकर अफसरों को सूचना मिली है कि नोटबंदी के दौरान पुराने नोट खपाने के लिए आरटीओ ने मुंह मांगी कीमत पर सोना खरीदा था। इसकी भी जांच की जा रही है। बता दें कि मंगलवार को आयकर जांच निदेशालय की टीम ने आरटीओ और ज्वाइंट कमिश्नर के तिलक नगर स्थित आवास पर छापा मारा था। 

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छापों की जद में अभी और भी हैं काले धन के कुबेर 
आयकर विभाग ने कानपुर शहर में कालेधन के कुबेरों की लिस्ट बहुत पहले तैयार कर ली थी। कारोबारियों से लेकर सरकारी अफसर तक इसकी जद में हैं। सूत्र बताते हैं कि शहर में 50 से ज्यादा ऐसे अफसर हैं जिन्होंने अपने रसूख का इस्तेमाल कर नोटबंदी के दौरान पांच लाख से पांच करोड़ रुपये तक जमा कराए हैं। आर्थिक मामलों के खुफिया विंग फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) की पड़ताल में ऐसे लोगों के नाम सामने आए हैं। एफआईयू ने आगे की पड़ताल के लिए कानपुर स्थित आयकर निदेशालय को इसकी लिस्ट भेजी थी।

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डेमो पिक
खुफिया चैनल से मिली संदिग्ध खातों की लिस्ट संदिग्ध लेनदेन वाले खातों की लिस्ट और नोटबंदी के दौरान सरकार के खुफिया चैनल से मिली जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई हो रही है। नौ से 25 नवंबर के बीच कानपुर की बैंकों से भेजी गई सूचनाओं की पड़ताल में पता चला कि करीब पांच सौ खातों में भारी भरकम रकम जमा हुई है। एफआईयू ने इन खाताधारकों की डीटेल तैयार कर कानपुर स्थित आयकर निदेशालय (इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन) को भेजी। आयकर अधिकारियों ने लंबे समय पर इसकी पड़ताल की। तथ्य सही पाए जाने पर एक एक को शिकंजे में कसा है। 
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एफआईयू में ऑटोमेटिक मॉनीटरिंग
फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) ने संदिग्ध लेनदेन वाले खातों और लोगों की जांच आयकर विभाग की विभिन्न विंगों को सौंपी है। पांच करोड़ से कम के मामले इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन विंग व इससे बड़े मामले आयकर निदेशालय (जांच) को सौंपी गई है।
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