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रिमझिम इस्पात समूह पर आयकर छापा: डाटा क्लोनिंग से और खुलेंगे राज, दिल्ली से बुलाए गए विशेषज्ञ

Sat, 30 Nov 2024 01:16 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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आयकर विभाग की टीम ने रिमझिम इस्पात समूह पर छापे के दौरान आजाद नगर स्थित कारपोरेट कार्यालय, निदेशक के तिलकनगर स्थित आवास से लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल फोन और कंप्यूटर व हार्ड डिस्क को कब्जे में लिया है। डाटा की क्लोनिंग के लिए दिल्ली से विशेषज्ञ बुलाए गए हैं, ताकि ई-मेल, मोबाइल फोन की चैट का डाटा रिकवर किया जा सके।
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सूत्रों के अनुसार, 15 बोगस फर्मों-कंपनियों की जानकारी आयकर विभाग को मिली है। इन कंपनियों के जो निदेशक हैं वे चौकीदार, माली या खाना बनाने वाले हैं। मोबाइल फोन की चैट को डिलीट कर दिया गया है। माना जा रहा कि चैट में लेनदेन से जुड़ी बातचीत हो सकती है। डाटा रिकवर होने पर जो जानकारी मिलेगी, उसके आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है। देशव्यापी छापे से अंदेशा जताया जा रहा है कि आयकर विभाग इस कारोबार से जड़े अन्य लोगों तक पहुंचना चाहता है। दिल्ली से आए विशेषज्ञों ने काम करना शुरू कर दिया है। बोगस फर्मों की पहचान की जा रही है।

2016 में 59 दिन जेल में रहे थे योगेश अग्रवाल
रिमझिम इस्पात के मालिक योगेश अग्रवाल के प्रतिष्ठानों पर आठ साल पहले सितंबर 2016 में सेंट्रल एक्साइज और डीजीजीआई ने कर चोरी के आरोप में देशव्यापी छापा मारा था। तब 23 अरब रुपये की कर चोरी के आरोप लगे थे। जब छापा पड़ा था तब अग्रवाल विदेश में थे। उनको हिरासत में लेने के लिए जांच टीमों ने सीबीआई की मदद ली थी। दिल्ली एयरपोर्ट से उन्हें गिरफ्तार किया गया था। 59 दिनों तक जेल में रहने के बाद वह बाहर आए थे।
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कोरोना काल में की थी ऑक्सीजन की आपूर्ति
कोरोना काल की दूसरी लहर में जब लोगों को ऑक्सीजन की जरूरत थी तब योगेश अग्रवाल ने हमीरपुर स्थित अपने प्लांट को बंद करके ऑक्सीजन के सिलिंडरों की सप्लाई की गई थी। उस समय अग्रवाल को ऑक्सीजन मैन की संज्ञा दी गई थी।
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