फर्जी इनवॉइस जारी करने वाली और सोनू सूद के साथ मिले कनेक्शन मामले में आयकर विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है। समूह की कंपनियां काले धन को सफेद करने के लिए म्यूचुअल फंड का सहारा ले रही थीं। आयकर अफसरों ने बडे़ पैमाने पर दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया है।
साथ ही कंपनी के कंप्यूटर का डाटा क्लोन करके जांच चल रही है। रिच समूह के ठिकानों पर चल रही छापेमारी शनिवार देर रात को खत्म हो गई थी। सूत्रों के मुताबिक, यह कंपनी कई स्रोतों से नकदी ले रही थी। उस रकम को एक बोगस कंपनी में निवेश करती थी।
उसके बाद उसको दूसरी बोगस कंपनी में निवेश कराया जाता था। कई बार किसी डमी व्यक्ति के नाम पर डिमैट अकाउंट खोलकर उसके नाम से म्यूचुअल फंड में निवेश किया जाता। म्यूचुअल फंड में निवेश के कुछ महीनों बाद उस पैसे को सफेद करके लाभार्थी को दे दिया जाता।
अभी तक म्यूचुअल फंड के सहारे ऐसा कोई मामला देखने को नहीं मिला है, जिसमें काले धन को सफेद किया जा रहा हो। जब कोई व्यक्ति म्यूचुअल फंड में निवेश करता है तो माना जाता है कि रकम एक नंबर की होगी, क्योंकि उस रकम के ऊपर कई प्रकार की जांच हो चुकी होती है।