नोटबंदी के दौरान बैंक में पुराने नोट जमा करने वाले कॉलेज और वहां स्टूडेंट्स के खातों की जांच इनकम टैक्स डिपार्टमेन्ट शुरु कर रहा है। इसके लिए स्पेशल टीमें बनाकर अलग-अलग बैंकों के डेटेल जुटाये जा रहे हैं। कानपुर शहर के नामचीन इंजीनियरिंग कॉलेजों और अन्य शैक्षिक न ट्रेनिंग संस्थानों के खाते आयकर विभाग के रडार पर हैं। बीते साल आठ नवंबर को हुई नोटबंदी के दौरान छात्रवृत्ति खातों में बड़ी रकम जमा होने और संदिग्ध लेन-देन पर आयकर विभाग ने कॉलेजों-संस्थानों के छात्रों के खातों की डिटेल समाज कल्याण विभाग से मांगी है। विभाग ने 72 कॉलेजों-संस्थानों के 1951 खातों की डिटेल आयकर विभाग को भेज दी है।
विभिन्न व्यावसायिक और शैक्षिक पाठ्यक्रमों के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से छात्रों को छात्रवृत्ति और फीस प्रतिपूर्ति दी जाती है। यह रकम छात्रों की संख्या और पाठ्यक्रमों की फीस के अनुसार कॉलेजों के खातों में भेज दी जाती है। वहां से इसे स्टूडेंट के खातों में भेजा जाता है। आरोप हैं कि नोटबंदी के बाद इन कॉलेजों-संस्थानों ने छात्रवृत्ति के खातों का इस्तेमाल कालेधन को सफेद करने में किया। इसमें बैंक अफसरों की भी संलिप्तता की बात सामने आ रही है। शहर में भी कुछ इंजीनियरिंग, मेडिकल, नर्सिंग कॉलेजों में ऐसा खेल होने का खुलासा हुआ था। छात्रवृत्ति के खातों से पुराने 500 और 1000 के नोटों को ठिकाने लगाने की सूचना पर आयकर विभाग ने इन खातों की डिटेल समाज कल्याण विभाग से मांगी थी। समाज कल्याण विभाग अधिकारी अलख निरंजन मिश्रा ने बताया कि आयकर विभाग की ओर से मांगी गई छात्रवृत्ति के खातों की जानकारी उपलब्ध करा दी गई है।
कई छात्र लगा चुके आरोप
बीते दिनों शहर के कई कॉलेज के छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन पर छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम हड़प लेने का आरोप लगाया था। इस मामले की शिकायत समाज कल्याण विभाग और सीडीओ से की थी। इस पर सीडीओ अरुण कुमार ने लीड बैंक मैनेजर को कॉलेजों के खातों की जांच के लिए पत्र भेजा था। लीड बैंक मैनेजर ने संबंधित बैंकों को पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट तलब की थी। इस जांच के दायरे में चार बैंकों की शाखाएं और 20 से अधिक कॉलेज आ रहे हैं।