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Kanpur News: दूसरे ऑडिट में भी 10 लाख रुपये की गड़बड़ी पकड़ी

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कानपुर। लाल इमली मिल कर्मियों के वेतन भुगतान में 23 महीने पहले हुए घोटाले में नई जानकारी मिली है। कुछ समय पहले दूसरी बार कराए गए ऑडिट में 10 लाख रुपये की और गड़बड़ी मिली है।
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पूर्व में 52 लाख रुपये का घोटाला सामने आया था। वहीं, मामले में चारों आरोपियों को मुंबई में चीफ विजिलेंस अफसर ने 19 जून को तलब किया है। इसके अलावा स्थानीय विजिलेंस अफसर को भी बुलाया गया है। मौजूदा समय में मिल कर्मियों को 36 महीने के वेतन भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। कपड़ा मंत्रालय ने इसके लिए 87.42 करोड़ रुपये जारी किए हैं।

बीआईसी, लालइमली और धारीवाल मिल में अब 260 कर्मचारी ही बचे हुए हैं। इसमें लाल इमली में 175 कर्मचारियों और अफसर हैं। डेढ़ साल पहले 102 करोड़ रुपये के बजट से 34 महीने का बकाया भुगतान किया गया था। इसमें 52 लाख रुपये का वेतन घोटाला सामने आया था। पता चला था कि चार अफसरों ने मिलकर अपने एक रिश्तेदार के खातों में रकम भेजी थी, जो मिल का कर्मचारी नहीं था। इसके बाद बीके मौर्या, राकी सेठी, मनोज शुक्ला, विनय मिश्रा को चार्जशीट देकर स्पष्टीकरण मांगा गया था। विनय मिश्रा को छोड़कर तीन अन्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसमें से बीके मौर्या ने स्वीकार किया था कि गलती से खाते में रकम चली गई थी।
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लाल इमली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अजय सिंह का कहना है कि अफसरों ने मिलकर लाखों रुपये का घोटाला किया है। यह भी पता चल चुका है कि आरोपी के रिश्तेदार के खाते में रकम गई थी। इसका ऑडियो भी है। इसके बाद भी अफसरों ने एफआईआर तक नहीं दर्ज कराई। विजिलेंस और चार्जशीट मामले की जांच के बाद इन पर सरकारी धन के दुरुपयोग और हेरफेर करने के लिए एफआईआर दर्ज कराई जानी चाहिए थी। सभी ने जानबूझकर वेतन में घोटाला किया है। उनका कहना है कि 23 से 31 मई तक ऑडिट टीम ने ऑडिट किया था। इसमें पूर्व में हुए वेतन भुगतान में 10 लाख रुपये की और गड़बड़ी मिली है। इसके मायने घोटाला की रकम 62 लाख हो गई है। कार्रवाई के लिए सीएमडी को कई पत्र भेजे गए। समय भी मांगा गया लेकिन आज तक नहीं मिला। आरोपियों को 19 जून को मुंबई में चीफ विजिलेंस अफसर ने बुलाया है।
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16 मई को जारी की गई रकम अब तक कर्मियों को नहीं मिली
कानपुर। कपड़ा मंत्रालय ने 36 महीने के बकाया भुगतान के लिए 16 मई को 87.42 करोड़ रुपये जारी किए थे। इसमें से केवल छह महीने का वेतन बांटा गया है। बकाया ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद बांटा जाना है। हालांकि ऑडिट की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन रिपोर्ट अब तक नहीं सौंपी गई है। कर्मचारियों की मांग है कि बकाया भुगतान जल्द से जल्द कराया जाए। सेवानिवृत्त समेत सभी कर्मियों का भुगतान किया जाए।

जल्द शुरू हो सकती है बंदी की प्रक्रिया
कानपुर। सूत्रों ने बताया कि बीआईसी के अधीन संचालित होने वाली लाल इमली मिल को जल्द से जल्द बंद किया जा सकता है। वेतन भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस पर तेजी से काम किया जाएगा। दरअसल, बीआईसी को पहले बंद किया जाएगा। पहले इसे एनटीसी के साथ बंद करने की योजना थी।
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