खाड़ी देशों और पाकिस्तान से आने वाली कॉल को करते थे डायवर्ट
आरोपी टेलीकॉम कंपनी से इंटरनेट कनेक्शन लेकर गेटवे के माध्यम से सर्वर में कनेक्ट होकर कॉलिंग कंट्रोल करते थे। इंटरनेशनल कॉल को देश में गेटवे के माध्यम से लैंड करवाया जाता था। ऐसे में जिस नंबर से फोन आता था, वह विदेश का दिखने के बजाय लोकल का दिखता था।
एनीडेस्क रिमोट एप्लीकेशन से कंट्रोल कर रहा था
आईएसडी कोड भारत का दिखने की वजह से नंबर लोकल रहता था। पूरे एक्सचेंज को नाजिम मुंबई से एनीडेस्क रिमोट एप्लीकेशन के माध्यम से कंट्रोल कर रहा था। आरोपी खाड़ी देशों और पाकिस्तान से आने वाले कॉल को डायवर्ट कराकर कानपुर, लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई शहरों के लोगों की कॉलिंग करा रहे थे।
मुंबई में बैठे सरगना की मदद से चल रहे थे टेलीफोन एक्सचेंज
शहर में चल रहे तीनों अवैध टेलीफोन एक्सचेंज को शाहिद मुंबई में बैठे नाजिम नसीम खान उर्फ नाजिम पटेल की मदद से चला रहा था। एटीएस को पूछताछ में पता चला है कि कहने को तो कानपुर में शाहिद ही इस एक्सचेंज को चला था लेकिन इसका असल सरगना मुंबई निवासी नाजिम नसीम खान ही है।
दूसरों के नाम से कोरियर भेजे जाते थे उपकरण और सिम
नाजिम ने शाहिद को कोरियर के जरिये लैपटॉप भेजे और उनमें एनीडेस्क नाम का रिमोट एप्लीकेशन अपलोड कराया, जिसकी मदद से वह मुंबई से कानपुर में टेलीफोन एक्सचेंज पर नियंत्रण रखता था। शाहिद और नाजिम की मुलाकात मुंबई में हुई थी और वहां भी दोनों अवैध एक्सचेंज चलाते थे।
एक्सचेंज चलाने में पहले भी जेल जा चुका है शाहिद
हालांकि 2017 में शाहिद पहले भी मुंबई में इसी तरह का अवैध सिमबॉक्स एक्सचेंज चलाने के मामले में पकड़ा गया। उस मामले में जमानत पर बाहर आने के बाद उसने नाजिम की मदद से कानपुर में अवैध टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित किए। इनसे सरकार को चुना लग रहा था।
टेलीग्राम के जरिये करते थे आपस में संपर्क
एक्सचेंज से जुड़ी सारी बातचीत सभी टेलीग्राम एप के जरिये करते थे। पूछताछ में शाहिद ने बताया है कि नाजिम कोरियर से सिमबॉक्स मशीनें, प्री एक्टिवेटेड सिम कार्ड, सभी उपकरण भेजता था। सुरक्षा एजेंसियों की आंख में धूल झोंकने के लिए शाहिद के बजाय मनीष शर्मा या अन्य व्यक्तियों के नाम से कोरियर भेजा जाता था।