शुक्लागंज नगर अंतर्गत मिश्रा कॉलोनी पक्के घाट के विद्युत शवदाह केंद्र में बने नगर पालिका गंगाघाट के मृतक पंजीयन कार्यालय में बैठे बाबू घाट के मुर्दों को भी नहीं छोड़ रहे हैं। मृतक रसीद काटने के नाम पर सौ से दो सौ रुपये तक की उगाही मृतक के तीमारदारों से कर रहे हैं। यही नहीं नगर के अन्य दो घाटों की वसूली का भी हिस्सा यहीं आता है, जिसका बंदरबाट शाम को होता है। इसकी शिकायत कई बार हो चुकी है, लेकिन समस्या जस की तस है।
बता दें कि मिश्रा कॉलोनी के पक्के घाट पर स्थित विदुयत शवदाह केंद्र में नगर पालिका गंगाघाट का मृतक पंजीयन कार्यालय खुला है। यहां आने वाले शवों का अंतिम संस्कार कराने से पहले उनका पंजीयन मैन्यूल तरीके से होता है और रजिस्टरों पर चढ़ाया जाता है। वैसे तो पंजीयन निशुल्क है, लेकिन यहां बैठने वाले पंजीयन बाबू और उनके गुर्गो द्वारा पंजीयन शुल्क के रूप में सौ से दो सौ रुपये लिए जाते हैं। रुपये न देने पर पंजीयन में कई प्रकार की कमियां बताई जाती हैं, जिसमें क्षेत्रीय पंडों का भी हिस्सा रहता है। यही नहीं अंतिम संस्कार कराने आने वालों से अंतिम संस्कार के नाम पर लूट-घसोट की जाती है और मनमानी रकम न मिलने पर अंतिम संस्कार कराने में लापरवाही बरती जाती है।
घाट पर रोजाना दस शवों का आना होता है। वहीं, नगर के बालू घाट और रविदास नगर श्मशान घाट पर कराए जाने वाले अंतिम संस्कार की उगाही का धन भी यहीं जुटता है, जिसका बंदरबाट रोज शाम को होता है। अंतिम संस्कार, पंजीयन से हुई उगाही और अन्य घाटों को मिलाकर रोजाना हजारों के वारे-न्यारे यहां होते है। यह सब पालिका के बाबू की शह पर होता है। घाट पर अंतिम संस्कार कराने आए चंदन, सुशील, मोनू, ऋषभ, महेश ने बताया कि अवैध उगाही की जानकारी कई बार पालिका में की जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। डीएम अर्पूवा दुबे ने बताया कि मामले जांच कराने के लिए ईओ गंगाघाट को बोला गया है।
पक्के घाट पर शासन की मंशा पर विद्युत शवदाह केंद्र यह सोचकर चालू कराया गया था कि लोगों को अंतिम संस्कार कराने में आसानी हो और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे, लेकिन जितनी बार भी मरम्मत कराने के बाद उसे चालू कराया गया, उसे कुछ खुरापाती लोगों के कारण चलने नहीं दिया गया और अब बंद है। जबकि सीताराम कॉलोनी स्थित नमामि गंगे श्मशान घाट पर सन्नाटा रहता है। यहां अंतिम संस्कार कराने जाने वालों को रोक दिया जाता है, जिन्हें बालू या मिश्रा कॉलोनी घाट जाने को बोला जाता है।