कानपुर में सचेंडी के गदनखेड़ा में खनन माफिया का आतंक चरम पर है। दुस्साहसी माफिया ने पुलिस की मिली भगत से अवैध खनन कर गांव की 150 बीघे से ज्यादा जमीन खोद डाली है। इसमें खेत, चकरोड और बाग शामिल हैं।
अवैध खनन की वजह से खेतों में पानी तक नहीं पहुंच पा रहा है। शिकायत के बाद भी पुलिस और प्रशासन मौन है। बेबस ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर मामले की शिकायत की है। गदनखेड़ा गांव में खनन का खेल नया नहीं कई सालों से चल रहा है।
बस पुलिस और प्रशासन की आंखें बंद हैं। अलग-अलग जगहों पर बीस से चालीस फीट गहरे गड्ढे खोदकर खेतों को तालाब बना दिया गया है। गांव के ही किसान धर्मेंद्र सिंह ने माफिया के आतंक से आजिज होकर मुख्यमंत्री पोर्टल पर मामले की शिकायत दर्ज कराई है।
किसानों का कहना है कि माफिया ने गांव की डेढ़ सौ बीघे से ज्यादा जमीन पर मिट्टी का खनन कर उन्हें गहरे तालाबों में बदल दिया है। इसके कारण माइनरों से आने वाला पानी इन्हीं तालाब जैसे गड्ढों में भर जाता है और खेतों तक नहीं पहुंच रहा है। विरोध करने पर माफिया के गुर्गे किसानों पर हमला भी करते हैं।
रातभर होता है अवैध खनन
ग्रामीणों ने बताया कि खेतों में रातभर अंधाधुंध खनन किया जाता है। शाम ढलते ही माफिया की जेसीबी मशीनों और डंपरों की गांव में आवाजाही शुरू हो जाती है। जेसीबी एक डंपर को मुश्किल से 15 मिनट में भर देती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि माफिया एक रात में कितनी मिट्टी खोद रहे हैं। माफिया इस मिट्टी को दलालों के जरिए आसपास खुल रही नई फैक्टरियों व प्लाटिंग करने वालों को महंगे दामों पर बेचते हैं।
छलनी कर दी पेड़ों की जड़ें
अवैध खनन से खेत और बाग भी खोद दिए गए हैं। यहां लगे पेड़ों की जड़ें तक छलनी कर दी हैं। खेतों में लगे नीम व अन्य पेड़ जड़ें कमजोर होने से गिर गए हैं।
कच्ची सड़क पर दौड़ते डंपर
ग्रामीणों के मुताबिक शाम से सुबह तक गांव की कच्ची सड़क पर मिट्टी से भरे डंपरों के अलावा कोई भी ग्रामीण नहीं निकलता। इस कच्ची सड़क पर सिर्फ माफिया की गाड़ियां ही दौड़ती हैं। डंपरों के कारण कच्ची सड़क भी चलने लायक नहीं है।
मजबूर कर रहे खेत बेचने को
ग्रामीणों के अनुसार खनन माफिया पहले किसान के खेत के आसपास अवैध खनन करते हैं। इतनी मिट्टी खोद देते हैं कि किसान का खेत टीले में तब्दील हो जाता है। बारिश होने पर खेतों की मिट्टी बहने के कारण फसल खराब होने लगती है।
इसी मजबूरी का फायदा उठाकर माफिया उनके खेत भी ले लेते हैं। जिसके बाद उनके खेतों को अंधाधुंध खोदकर तालाबों में बदल दिया जाता है। किसान उनकी शिकायत करते हैं तो माफिया जान से मारने की धमकी देते हैं। जिम्मेदार शिकायत पर गौर ही नहीं करते।
सहमति पत्र के बहाने खोदते हैं खेत
नियम यह है कि जिन किसानों के खेतों में मिट्टी ज्यादा जमा होती है, वे खेती के लिए उसे हटवाते हैं। मिट्टी हटाने वालों से बाकायदा एक सहमति पत्र बनता है। इसमें यह उल्लेख किया जाता है कि मिट्टी कितनी खोदी जानी है। यह खेत के आकार और मिट्टी पर भी निर्भर करता है। साथ ही मिट्टी अगल बगल डाली जाएगी। लेकिन खनन माफिया खुलेआम चार की जगह 40 फीट तक मिट्टी खोदते हैं और उसे अगल-बगल डालने के बजाय बेच देते हैं।