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आईआईटी का नया शोध: दृष्टिहीनों को रास्ता दिखाऐंगे-पहचान कराऐंगे चश्मा और ग्लव्स

Mon, 06 Jan 2020 12:46 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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आईआईटी कानपुर
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आईआईटी कानपुर का नया शोध दृष्टहीनों के जीवन में रोशनी लाएगा। ऐसा चश्मा और ग्लव्स विकसित किए गए हैं, जिनकी मदद से चीजों की पहचान करना आसान होगा। 31 दिसंबर 2019 को इनका पेटेंट करा लिया है। जल्द यह चश्मा व ग्लव्स बाजार में उपलब्ध होंगे। 
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आईआईटी के वैज्ञानिकों ने चश्मा और ग्लव्स आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से तैयार किया है। आईआईटी कानपुर के डॉ. सिद्धार्थ पंडा व विश्वराज श्रीवास्तव ने लंबे शोध के बाद अत्याधुनिक चश्मा व ग्लव्स बनाया है।

डॉ. पंडा ने बताया कि दृष्टिहीनों को रोजमर्रा के काम करने में काफी दिक्कत होती है। उदाहरण के तौर पर ट्रेन में अपनी बर्थ को कैसे पहचानें, सामने से कौन आ रहा है। इन परेशानियों को ग्लव्स और चश्मे की मदद से दूर किया जा सकता हैं।  
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उन्होंने बताया कि चश्मा वर्चुअल फोटोग्राफ बनाता है और ग्लव्स वाइब्रेशन और सेंसर के जरिये जानकारी देता है। चश्मे में मेमोरी भी लगी है, जो हर चेहरे को अपने डाटा में सुरक्षित रखे रहता है। मतलब एक बार कोई व्यक्ति अगर सामने आकर अपना नाम बता देता है, तो वह दोबारा कभी भी सामने आएगा, दृष्टिहीन को पता चल जाएगा।

फिर चाहे वह अपना हुलिया बदलकर भी आए। उन्होेंने कहा कि यह अब तक का सबसे अनोखा शोध है। दृष्टिहीन व्यक्ति के लिए यह फेस रिकग्निशन, एजूकेशन डिवाइस, एंटरटेनमेंट डिवाइस, टेक्स्ट रीडर की तरह काम करेगा
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