गणितीय मॉडल सूत्र को सीरो सर्वे के साथ जोड़ लिया जाए तो देश में छिपे संक्रमितों को खोजने में आसानी होगी। यूएस में 4.5 में एक, यूके में 3.2 में एक और साउथ अफ्रीका में 17 में एक मामले का ही पता चल पा रहा है।
भारत में कोरोना के 33 केसों में एक ही केस सामने आ पाता है। 32 मामले छिपे ही रह जाते हैं क्योंकि बेहतर प्रतिरोधक क्षमता के कारण लोगों को संक्रमण का अहसास ही नहीं हो पा रहा है। शुक्रवार को आईआईटी के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने ट्वीट करके यह दावा किया है।
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प्रो. अग्रवाल का कहना है कि उनके गणितीय मॉडल सूत्र को सीरो सर्वे के साथ जोड़ लिया जाए तो देश में छिपे संक्रमितों को खोजने में आसानी होगी। यूएस में 4.5 में एक, यूके में 3.2 में एक और साउथ अफ्रीका में 17 में एक मामले का ही पता चल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन वैरिएंट के फैलने की रफ्तार डेल्टा से काफी तेज है। अब तक देश में आए डाटा के आधार पर आकलन किया जा रहा है। बढ़ते केसों को देखते हुए फरवरी की शुरुआत में तीसरी लहर के पीक पर होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सीरो सर्वे की एक सीमा है, वह सीरो सर्वे के समय तक ही लापता केसों का पता लगाते हैं।
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भविष्य की स्थितियां अलग हो सकती हैं। उनका दावा है कि 80 फीसदी भारतीयों में सेल्फ नेचुरल इम्युनिटी (कोरोना संक्रमण के बाद पैदा हुई इम्युनिटी) विकसित हो चुकी है। इस कारण अस्पताल में कम संख्या में संक्रमित भर्ती हो रहे हैं।