आईआईटी कानपुर में जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग के मामले में आरोपी सभी 22 छात्रों को सीनेट ने पढ़ाई करने की अनुमति दे दी है। प्रोफेसर अभय करंदीकर की अध्यक्षता में सीनेेट की बैठक में यह फैसला लिया गया है।
सीनेट ने कहा है कि चूंकि हाईकोर्ट ने छात्रों की पढ़ाई अंतिम आदेश आने तक बहाल करने के लिए कहा है। इसी आदेश का पालन करते हुए छात्रों को पढ़ाई करने की अनुमति दे दी गई है। हालांकि, सभी आरोपी छात्र उसी सेमेस्टर की पढ़ाई करेंगे, जिसमें उनकी पढ़ाई पर रोक लगाई गई थी।
इस संबंध में आरोपी छात्रों को पत्र भेजा जा चुका है। आरोपी छात्रों को समर सेमेस्टर से पढ़ाई शुरू करने के लिए अस्थायी पंजीकरण (प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन) कराना होगा। सेमेस्टर की शुरुआत 20 मई से हो रही है।
रैगिंग का यह मामला पिछले साल 19-20 अगस्त की रात का है। आरोप है कि इंस्टीट्यूट के हॉल-2 (स्टूडेंट हॉस्टल) में कई सीनियरों ने जूनियर छात्रों पर गलत हरकतें करने का दबाव बनाया। मना करने पर उन्हें गालियां दी गईं। कुछ ने पिटाई का भी आरोप लगाया था। पीड़ित जूनियर छात्रों की शिकायत पर डीन, स्टूडेंट वेलफेयर कमेटी और एंटी रैगिंग कमेटी ने जांच के बाद 22 छात्रों को चिह्नित किया था।
उन्हें टर्मिनेट करने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई थी। इसमें एक नाम स्टूडेंट जिमखाना के प्रेसिडेंट रितुज जुगाड़े का भी था। इसके बाद 14 छात्रों को 3 साल और बाकी को 6 महीने के लिए सस्पेंड कर दिया गया था।