आईआईटी कैंपस में आवाजाही के लिए अब छात्रों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। मुख्य गेट से कैंपस के अंदर तक दस सोलर रिक्शे चलाए जाएंगे। फिलहाल पांच रिक्शे शनिवार को सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (सीईएल) की तरफ से आईआईटी प्रशासन को कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) के जरिये गिफ्ट किए गए। शेष पांच रिक्शे भी जल्द कैंपस आ जाएंगे। इस दौरान सीईएल की तरफ से समझौता भी किया गया।
आईआईटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि रिक्शों का संचालन जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। कौन चलाएगा और इसके संचालन का प्रारूप क्या होगा इस पर फैसला फिलहाल नहीं हो पाया है। सीईएल के चेयरमैन और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर बीएन सरकार ने बताया कि एक बार सोलर एनर्जी से चार्ज होने के बाद रिक्शा तीन से चार घंटे तक आराम से चल सकेगा।
इसके बाद अगर बैट्री खत्म भी हो जाएगी तो चालक इसे पैडल से चला सकेगा। इसमें 12 वोल्ट की चार बैट्री व 300 वॉट का सोलर पैनल लगाया गया है। एक रिक्शे की कीमत करीब 68 हजार रुपये है जबकि सामान्य ई-रिक्शा की कीमत करीब 1.25 लाख है। इस दौरान आईआईटी मोटर्स ट्रांसपोर्ट सेक्शन के प्रभारी प्रो. शलभ, सीएमडी सीईएल पंकज मल्होत्रा, अतुल भार्गव, जीएम अनिल महाजन, एसके आचार्य, मनोज शर्मा आदि मौजूद रहे।
सौर ऊर्जा से खुद के लिए बिजली बना रहा आईआईटी
निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि कैंपस में प्रतिमाह 10.3 मेगावॉट बिजली की खपत होती है। इस पर करीब हर साल 15 करोड़ रुपये खर्च किया जाता है। अब 1.8 मेगावॉट बिजली सौर ऊर्जा से तैयार की जाने लगी है। इसे और बढ़ाने की तैयारी है।