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आईआईटी के विशेषज्ञों व यूपीसीडा के अफसरों ने क्रोमियम कचरा निस्तारण के लिए देखी भूमि

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खानचंद्रपुर में क्रोमियम कचरा डंपिंग स्थल देखती आईआईटी व यूपीसीडा की टीम। (संवाद) - फोटो : AKBARPUR
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रनियां (कानपुर देहात)। खानचंद्रपुर में मटियामऊ रोड पर क्रोमियम कचरा डंप स्थल का बुधवार को आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने यूपीसीडा के अफसरों की मौजूदगी में निरीक्षण किया।
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क्रोमियम कचरा निस्तारण के लिए डंप के पास की भूमि की देखी। इस भूमि को विशेषज्ञ टीम प्राथमिकता दे रही है। कचरा निस्तारण के लिए 25 बीघा जमीन की आवश्यकता है, हालांकि अभी इसके लिए भूमि चिह्नित नहीं की गई है।
अकबरपुर तहसील के खानचंद्रपुर में मटियामऊ रोड किनारे छह फैक्टरियों का 63 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा डंप है। इसकी वजह से भूगर्भ जल दूषित हो गया है। एनजीटी ने कचरा डंप करने वाली फैक्टरियों के संचालकों पर 280 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
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अभी जुर्माना राशि की वसूली नहीं हो सकी। एनजीटी ने राज्य सरकार को क्रोमियम कचरा निस्तारण के निर्देश दिए है। इस पर यूपीसीडा को कार्यदायी संस्था बनाया गया है।
कानपुर आईआईटी के दिशा निर्देशन में क्रोमियम कचरा निस्तारण करने की कार्य योजना बनाई गई है। 10 नवंबर को एसडीएम वागीश कुमार शुक्ला व लेखपालों ने खानचंद्रपुर में हाईवे से पांच किलोमीटर दूर स्थिति भूमि व आठ किमी दूर किशरवल गांव की भूमि देखी थी।
बुधवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक आरके सिंह, आईआईटी प्रोफेसर राजेश सत्यमूर्ति, प्रोफेसर आभास सिंह व तकनीकि सहायक संदीप बौरा व यूपीसीडा के अधिशाषी अभिंयता संजय तिवारी, एसडीएम सदर व तहसीलदार रणविजय सिंह ने क्रोमियम डंप स्थल देखा।
सभी ने इससे लगी भूमि भी देखी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निदेशक ने बताया कि सर्वे के बाद यह पता चल सकेगा कि क्रोमियम कचरा कितनी भूमि पर बिखरा है। निस्तारण के लिए नजदीक की भूमि अधिक उपयुक्त रहेगी।
लेखपाल राकेश मिश्रा ने उन्हें बताया कि 21 बीघा जमीन में क्रोमियम डंप है। उसके बगल में 15 बीघा सरकारी जमीन है। यूपीसीडा को लगभग 25 बीघा जमीन की आवश्यकता है। एसडीएम सदर ने बताया कि जमीन की नापजोख जल्द कराई जाएगी।
अकबरपुर तहसील के अफसरों व राजस्व टीम के साथ दो स्थानों पर भूमि देखी गई थी। डंप स्थल से यह दोनों जगह दूरी पर हैं। अब डंप स्थल के ठीक नजदीक की भूमि देखी गई है। यह भूमि मिलने पर क्रोमियम कचरा शिफ्ट करने में आसानी होगी। लगभग 25 बीघा भूमि की जरूरत है।
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- संजय तिवारी, एक्सईएन यूपीसीडा
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